✍️राजनीतिक चर्चाएं

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✍️राजनीतिक चर्चाएं

याद है सारे बुद्धिजीवी कैसे गला फाड़ फाड़ के चिल्ला रहे थे कि मोदी जबरन सबके एकाउंट काहे खुलवा रहा है। कभी बैंक कर्मियों के कंधे पर बंदूक रख के चला रहे थे कि देखो मोदी इनका वर्कलोड बढ़ा दिया है तो कभी गरीबों के नाम पर हल्ला मचा रहे थे कि सरकार फालतू में एकाउंट खुलवा रही है। आज उन्हीं एकाउंट के माध्यम से मोदी 1 लाख 70 हज़ार करोड़ की मदद इस देश के करोड़ों परिवारों तक पहुंचा रहा है। सोचिए कांग्रेस होती तो फिर कोई राजीव गांधी ये कह के पल्ला झाड़ लेता कि हम तो एक रुपया भेजते हैं लेकिन 95 पैसे बीच के दलाल खा जाते हैं..या इकोनॉमिस्ट मनमोहन सिंह होते तो "पैसे पेड़ पे नहीं लगते" कह के निकल लिए होते। मोदी तब भी जानता था वो क्या कर रहा है और आज भी जानता है कि वो क्या कर रहा है। बुद्धिजीवी तब भी झूठ फैला रहे थे और आज भी अफवाहें ही उड़ा रहे हैं। #✍️राजनीतिक चर्चाएं
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2 दिन पहले
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