#राधे कृष्ण
**मयूरों के साथ नृत्य प्रतियोगिता**
सावन-भादों की रिमझिम फुहारों से पूरा ब्रज धाम हरा-भरा हो उठा था। घने कदंब वृक्षों के बीच जब बादलों की मधुर गड़गड़ाहट गूँजी, तब वन के सुंदर मयूर अपने रंग-बिरंगे पंख फैलाकर आनंद से नृत्य करने लगे। उनकी मधुर पुकार और लयबद्ध थिरकन से वातावरण मानो संगीत से भर गया।
यह मनोहर दृश्य देखकर नन्हे श्रीकृष्ण भी मुस्कुराते हुए मयूरों के बीच पहुँच गए। उन्होंने एक पैर पर खड़े होकर मयूरों की चाल और नृत्य की इतनी प्यारी नकल की कि सभी मयूर मानो उन्हें अपना साथी समझकर और भी उत्साह से नाचने लगे। उनके नन्हे चरणों की थिरकन, पायल की मधुर झंकार और चेहरे की निष्कलुष मुस्कान ने पूरे वन को आनंद से भर दिया।
धीमी वर्षा की फुहारें, हवा में झूमते वृक्ष, खिलते कमल, चहचहाते पक्षी और नृत्य करते मयूर—इन सबके बीच बाल गोपाल का यह अलौकिक किंतु बाल-सुलभ खेल ब्रजवासियों के लिए अविस्मरणीय दृश्य बन गया। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो स्वयं प्रकृति भी श्रीकृष्ण के साथ इस आनंदमय नृत्य में सम्मिलित होकर सावन का उत्सव मना रही हो।