for social awareness

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आख़िर तुम इतना डरते क्यों हो? कभी सोचा है — इस डर की वजह क्या है? सच बोलने से डरते हो? सवाल उठाने से डरते हो? या फिर इस बात से डरते हो कि अगर तुमने आवाज़ उठाई तो क्या होगा? “आख़िर तुम इतना डरते क्यों हो?” एक Hindi protest song है जो डर, ख़ामोशी, सवाल पूछने की हिम्मत और अपनी आवाज़ को पहचानने की कोशिश करता है। डर हमेशा बंदूक लेकर नहीं आता। कभी नौकरी खोने का डर बनकर आता है, कभी लोगों के क्या कहने का डर, कभी अकेले पड़ जाने का डर और कभी अपने ही आसपास की ख़ामोशी बनकर। यह गीत किसी एक व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि उस मानसिकता और डर पर सवाल है जो इंसान को सच देखने के बाद भी चुप रहने पर मजबूर कर देता है। अगर आपने कभी कुछ गलत होते देखा है और बोलने से पहले रुक गए हैं… अगर आपने कभी कोई सवाल अपने मन में रखा लेकिन पूछा नहीं… अगर आपने कभी सच लिखकर उसे पोस्ट करने से पहले delete कर दिया… तो शायद यह गीत आपके लिए है। आख़िर तुम इतना डरते क्यों हो? सोचिए। सवाल कीजिए। अपनी आवाज़ पहचानिए। ##AakhirTumItnaDarteKyunHo ##HindiProtestSong#FreedomOfSpeech#Democracy#SawalPucho#AwaazUthao#SachBolo #Youth Voice #for social awareness
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पच्चीस तबादले, करीब दो दशक की सेवा—और फिर भी ड्यूटी से पीछे नहीं हटे तुकाराम मुंडे। यह गीत सिर्फ एक अफ़सर की तारीफ़ नहीं है। यह एक सवाल है—अगर कोई अधिकारी कानून के मुताबिक अपना काम करता है, तो बार-बार तबादले आखिर क्यों? क्या ईमानदारी से काम करना किसी अधिकारी के लिए सज़ा बन जाना चाहिए? और अगर किसी ईमानदार अधिकारी का जल्दी तबादला होता है, तो क्या जनता को चुप रहना चाहिए? हम संजीव भट्ट और अशोक खेमका का साथ उस समय नहीं दे सके। कम-से-कम आज तुकाराम मुंडे जैसे अधिकारियों का हौसला तो बढ़ा सकते हैं। कुछ नहीं कर सकते तो एक Reel बनाइए। एक पोस्ट कीजिए। एक आवाज़ उठाइए। यह गीत किसी व्यक्ति के खिलाफ व्यक्तिगत अभियान नहीं, बल्कि प्रशासनिक स्वतंत्रता, निष्पक्षता और जवाबदेही पर सवाल उठाने वाली एक रचनात्मक अभिव्यक्ति है। 🇮🇳 जय हिन्द। ##TukaramMundhe#25Transfers #IAS#ProtestSong #for social awareness
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