...
515 views
कबीर ,
बंधे को बंधा मिला, छूटै कौन उपाय।
कर सेवा निरबंध की, पल में लेत छुड़ाय।।
भावार्थ:-कबीर साहेब जी कहते हैं कि जो पहले ही स्वयं बंधन (माया-मोह) में पड़ा हुआ हो, उसे दूसरा बंधा हुआ (अज्ञानी) मिल गया, तो वह किस उपाय से छूट सकता है? अतः बंधन से मुक्त ज्ञानवान सद्गुरु की सेवा करनी चाहिए जो तत्वज्ञान से काल के बंधन से छुड़ा सकते हैं।
पवित्र गीता जी में गीता ज्ञान दाता भी तत्वदर्शी संत के शरण में जाने को बोल रहा हैं गीता अध्याय 15 श्लोक 1 से 4 में प्रमाण हैं।
#kabir_is_supreme_god
18 likes
9 shares