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भारत के पुर्व राष्ट्रपति फ़ख्रुद्दीन अली अहमद
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digital निर्माता
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शुरू में ध्यान खींचने वाला हुक: जब देश का प्रथम नागरिक शांतिपूर्वक धर्मिक परंपरा में खड़ा हो—ये सिर्फ तस्वीर नहीं, पब्लिक साइकोलॉजी का एक पावरफुल सिग्नल है! द्रौपदी मुर्मू ने हाल ही में साबरिमला में इरुमुडी लेकर पूजा की — एक ऐसा क्षण जो राष्ट्रपति के संवैधानिक रोल और व्यक्तिगत श्रद्धा को साथ में दिखाता है, और इसलिए यह न सिर्फ इतिहास का पन्ना बल्कि सामाजिक संकेत (social signaling) और पहचान-निर्माण का वैज्ञानिक उदाहरण भी है; जैसे समूह-डायनमिक्स और मानवीय नॉर्मस् पर छोटा सा ऐक्शन बड़े भावनात्मक प्रभाव पैदा कर देता है। “She broke no rules, hurt no faith, she only honoured it” — इस लाइन ने भी दर्शाया कि कैसे एक शांत, कांटेस्ट-फ़्री इशारा बहुसंख्यक विश्वासों को जोड़ सकता है। यह तथ्य (राष्ट्रपति का यह कदम) यह भी बताता है कि संवैधानिक पदों पर बैठे लोग परंपरा और आधुनिकता के बीच पुल बनाकर सामाजिक सहमति को प्रोत्साहित कर सकते हैं — तर्क के हिसाब से जब नेतृत्‍व 'प्रतिबद्धता' दिखाता है तो भरोसा और स्थिरता बढ़ती है (यही reason वोटर perceptions और सोशल कॉहेशन में असर डालता है)। 🔥🇮🇳🙏📜💬 #राष्ट्रपति #DroupadiMurmu #साबरिमला #HistoricVisit #FaithAndConstitution @ रघुनाथ दामले गुना द्वारा राष्ट्रपति को‌ बधाई @राष्ट्रपाल शेंडे @राष्ट्रपाल दोडे @राष्ट्रहित सर्वोपरी @ राष्ट्रपुत आकाश कुमार #राष्ट्रपति #भारत के पुर्व राष्ट्रपति फ़ख्रुद्दीन अली अहमद #jai shree radhekrishna ji #jai shree radhekrishna status #viral
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