10 मार्च की न्यूज़
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Bharat Positive
#10 मार्च की न्यूज़ इन्हें पाकिस्तानी पीएम शांति का मसीहा नज़र आता है और अपने देश के पीएम में आतंकी दिखता है
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9 महीने पहले
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10 मार्च की न्यूज़

SAROJ RAJA
#10 मार्च की न्यूज़ आयोग ने बताया- लोकसभा चुनाव में इस बार कुल 90 करोड़ मतदाता, इनमें 18-19 साल के 1.5 करोड़ नए मतदाता पिछली बार 9 लाख मतदान केंद्र थे, इस बार 10 लाख पोलिंग बूथ 2014 में 7 अप्रैल से 12 मई के बीच मतदान हुआ था, 16 मई को नतीजे आए थे नई दिल्ली. लोकसभा चुनाव के लिए रविवार को तारीखों का ऐलान हो गया है। इस बार लोकसभा चुनाव 7 चरणों में होंगे। 11 अप्रैल, 18 अप्रैल, 23 अप्रैल, 29 अप्रैल, 6 मई, 12 मई और 19 मई को वोटिंग होगी। 23 मई को नतीजे आएंगे। तीन जून तक नई लोकसभा का गठन हो जाएगा। मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने बताया कि इस बार लोकसभा चुनाव में कुल 90 करोड़ वोटर होंगे। इनमें 8.4 करोड़ नए मतदाता शामिल हैं। कुल वोटर में से 99.3 के पास वोटर आईडी है। 1.5 करोड़ वोटर 18-19 साल की उम्र के हैं। लोकसभा चुनाव के लिए आज से देशभर में आचार संहिता लागू हो गई है। चुनाव आयुक्त ने बताया, पिछली बार 9 लाख मतदान केंद्र थे, इस बार 10 लाख पोलिंग बूथ होंगे। लोकसभा चुनाव के लिए हेल्पलाइन नंबर-1950 होगा। सभी चुनाव अधिकारियों की गाड़ी में जीपीएस होगा। मोबाइल पर ऐप के जरिए भी आयोग को आचार संहिता के उल्लंघन की जानकारी दी जा सकती है और 100 मिनट के भीतर हमारे अधिकारी को इस पर एक्शन लेना ही होगा। शिकायतकर्ता की निजता का ख्याल रखा जाएगा। अरोड़ा ने बताया, अगर प्रत्याशी अगर फॉर्म 26 में सभी जानकारियां नहीं भरता तो उसका नामांकन रद्द हो जाएगा। साथ ही बिना पैनकार्ड वाले उम्मीदवारों का नामांकन रद्द होगा। किन राज्यों में कितने चरण में होगी वोटिंग? एक चरण में: आंध्र, अरुणाचल, गोवा, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल, केरल, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, पंजाब, सिक्किम, तेलंगाना, तमिलनाडु, उत्तराखंड, अंडमान-निकोबार, दादरा नगर हवेली, दमन एंड दीव, लक्षद्वीप, दिल्ली, पुडुचेरी, चंडीगढ़। दो चरण में : कर्नाटक, मणिपुर, राजस्थान, त्रिपुरा। तीन चरण में : असम, छत्तीसगढ़। चार चरण में : झारखंड, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा। पांच चरण में : जम्मू-कश्मीर सात चरण में : बिहार, उत्तर प्रदेश, प. बंगाल। छह बड़े चेहरे नरेंद्र मोदी : भाजपा ने 2013 में माेदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया था, तब से लोकसभा चुनाव समेत 32 चुनाव हो चुके हैं। हर चुनाव में मोदी ही भाजपा के लिए प्रचार का प्रमुख चेहरा रहे हैं। अमित शाह : पिछले लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश के प्रभारी रहे अमित शाह ने राज्य में एनडीए को 80 में से 73 सीटें दिलवाई थीं। जुलाई 2014 में उन्हें भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया। शाह के अध्यक्ष बनने के बाद अब तक 27 राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए। इनमें से 14 चुनावों में भाजपा को जीत और 13 में हार मिली। राहुल गांधी : दिसंबर 2017 में कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद राहुल गांधी को 2018 के आखिर में कामयाबी मिली जब मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने भाजपा को सत्ता से बाहर कर दिया। 20 साल में यह पहला मौका है, जब लोकसभा चुनाव में सोनिया गांधी कांग्रेस का नेतृत्व नहीं करेंगी। राहुल के नेतृत्व में पार्टी का यह पहला लोकसभा चुनाव होगा। प्रियंका गांधी : राहुल गांधी ने प्रियंका को इसी साल 23 जनवरी को कांग्रेस महासचिव बनाया और पूर्वी उत्तर प्रदेश की 41 लाेकसभा सीटों की जिम्मेदारी सौंपी। नेहरू-गांधी परिवार से कांग्रेस में यह 11वीं एंट्री है। इससे पहले प्रियंका सिर्फ अमेठी-रायबरेली में ही प्रचार करती थीं। ममता बनर्जी : मोदी विरोधी महागठबंधन को आकार देने की कोशिशों में ममता बनर्जी सबसे प्रमुख चेहरा हैं। 2014 में मोदी लहर के बावजूद बंगाल में ममता की तृणमूल कांग्रेस ने 42 में से 34 सीटें जीती थीं। ममता ने हाल ही में कोलकाता में विपक्ष की बड़ी रैली की थी। इसमें 15 से ज्यादा दलों के नेता शामिल हुए थे। हालांकि, ममता बंगाल में कांग्रेस के साथ गठबंधन से इनकार कर चुकी हैं। मायावती-अखिलेश : 2014 के लोकसभा चुनाव में सपा सिर्फ 5 सीटों पर जीत पाई थी। वहीं, बसपा का खाता भी नहीं खुला था। लेकिन दोनों पार्टियों का उत्तर प्रदेश में वोट शेयर 20% के आसपास था। 25 साल बाद दोनों दल भाजपा को रोकने के लिए साथ आए हैं। 2014 में भाजपा का उत्तर प्रदेश में वोट शेयर 43% था। ऐसे में मायावती-अखिलेश का साथ आना भाजपा के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकता है। इन 4 राज्यों के नतीजे चौंका सकते हैं आंध्र प्रदेश : पिछली बार तेदेपा ने यहां भाजपा के साथ गठबंधन किया था। दोनों दलों ने राज्य की 25 में से 17 सीटें जीती थीं। तेदेपा अब एनडीए से बाहर हो चुकी है। वहीं, जगनमोहन रेड्डी पिछले पांच साल से राज्य में लगातार यात्राएं कर राज्य में अपनी पार्टी वाईएसआरसीपी की पकड़ मजबूत करने की कोशिश में हैं। केरल : सबरीमाला मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला राज्य में सबसे ज्यादा चर्चा में रहा। कोर्ट के आदेशानुसार सत्ताधारी वाम दल हर उम्र की महिला को सबरीमाला मंदिर में प्रवेश देने के पक्ष में था, वहीं भाजपा-कांग्रेस ने फैसले का खुलकर विरोध किया था। राज्य में बड़े स्तर पर विरोध-प्रदर्शन भी हुए। ऐसे में माना जा रहा है कि 20 लोकसभा सीटों वाले इस राज्य में भाजपा पहली बार मुकाबले में दिख रही है। तमिलनाडु : राज्य की राजनीति के दो सबसे बड़े चेहरों एम करुणानिधि और जे. जयललिता के निधन के बाद यह पहला लोकसभा चुनाव है। द्रमुक ने इस बार कांग्रेस और अन्नाद्रमुक ने भाजपा-पीएमके के साथ गठबंधन किया है। पिछली बार राज्य की 39 में से 37 लोकसभा सीटें जीतने वाली अन्नाद्रमुक इस बार सिर्फ 27 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। वहीं, द्रमुक ने भी 9 सीटें कांग्रेस के लिए छोड़ी हैं। ओडिशा : 2014 लोकसभा चुनाव में मोदी लहर के बावजूद यहां भाजपा सिर्फ एक सीट जीत पाई थी। तीन बार से मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की पार्टी बीजद ने 21 में से 20 सीटें जीती थीं। मोदी ने यहां दिसंबर और जनवरी में कई दौरे किए हैं। पांच बड़े मुद्दे राष्ट्रवाद : पुलवामा हमले के बाद भाजपा ने राष्ट्रवाद को मुख्य मुद्दा बनाया है। पाकिस्तान : वायुसेना ने पुलवामा हमले के बाद पाक में आतंकी शिविर पर हमला किया। इस हमले के सबूतों को लेकर भाजपा और विपक्ष आमने-सामने हैं। राफेल : कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी लगातार यह आरोप लगा रहे हैं कि राफेल डील में मोदी सरकार ने भ्रष्टाचार किया है। वहीं, सरकार राफेल को देश की जरूरत बता रही है। किसान : केंद्र सरकार ने अंतरिम बजट में छोटे किसानों के खाते में हर साल 6000 रुपए ट्रांसफर करने का ऐलान किया था। मोदी अपनी रैलियों में इसे क्रांतिकारी कदम बता रहे हैं। वहीं, कांग्रेस मप्र, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में किसानों की कर्ज माफी का मॉडल देशभर में लागू करने का वादा कर रही है। राम मंदिर : भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस के अड़ंगों की वजह से अयोध्या विवाद पर जल्द फैसला नहीं आ पा रहा। वहीं, कांग्रेस का कहना है कि भाजपा सिर्फ चुनाव के समय यह मुद्दा उठाती है।
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9 महीने पहले
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🙏 जिहादियों 🐯का बाप 🇮🇳🚩विश्व हिन्दू परिषद्🚩राजू सिंह युवा नेता🦁
#10 मार्च की न्यूज़
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9 महीने पहले
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10 मार्च की न्यूज़

✅ 10 मार्च का इतिहास ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार 10 मार्च वर्ष का 69 वाँ (लीप वर्ष में यह 70 वाँ) दिन है। साल में अभी और 296 दिन शेष हैं। ❇ 10 मार्च की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ 1876 - ग्राहम वेल ने पहली बार टेलिफोन पर अपने मित्र से बात की। उन्होंने अपने मित्र से कहा कि "मेरी आवाज़ सुनो, मैं एलेक्ज़ेंडर ग्राहम बेल।" 1922 - महात्मा गांधी गिरफ्तार किए गए, राजद्रोह का आरोप, छेह वर्षो की क़ैद, परन्तु दो वर्ष बाद रिहा किए गए। चीन द्वारा परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर। 1945 - माधवराव सिंधिया, कांग्रेस के नेता 1998 - इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुहार्तो लगातार सातवीं बार राष्ट्रपति पद पर निर्वाचित। 2002 - फ़िलिस्तीन के राष्ट्रपति यासर अराफात के आने-जाने पर लगा प्रतिबंध हटा, पाकिस्तान ने दक्षेस गृह मंत्रियों के सम्मेलन का प्रस्ताव रखा। 2003 - उत्तर कोरिया ने क्रूज मिसाइल का परीक्षण किया, संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफी अन्नान ने सुरक्षा परिषद के सदस्यों से आग्रह किया कि वे इराक के निरस्त्रीकरण के बारे में अपने मतभेदों को दूर करें और कोई आम राय क़ायम करें। 2006 - पाकिस्तान के क्वेटा शहर में बारूदी सुरंग विस्फोट में 26 मारे गये। 2007 - यूक्रेन के वैसिलीइवानचुक को हराकर विश्वनाथन आनन्द शतरंज में प्रथम स्थान पर पहुँचे। 2008 - माणिक सरकार की अगुवाई में त्रिपुरा में पुन: लेफ़्ट फ़्रंट ने सत्ता संभाली। वरिष्ठ काँग्रेस नेता डी. डी. लपांग ने मेघालय के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। मलेशिया के अब्दुल्ला बदावी देश के पुन: प्रधानमंत्री बनें। 2010 - भारतीय संसद की ऊपरी सदन राज्यसभा में महिला आरक्षण विधेयक पारित हो गया। 2017- दक्षिण कोरिया की राष्ट्रपति पार्क ग्यून-हाय को संवैधानिक कोर्ट ने पद से हटा दिया। 2018 - श्रीलंका में साम्प्रदायिक दंगों में अब तक दो लोगों की मृत्यु, दस घायल। ❇ 10 मार्च को जन्मे व्यक्ति 1981 - वाजिद ख़ान - भारत के प्रसिद्ध चित्रकार और अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त आयरन नेल आर्टिस्ट, पेटेंट धारक तथा आविष्कारक हैं। 1932 - उडुपी रामचन्द्र राव - अंतरिक्ष वैज्ञानिक और 'इसरो' (भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन) के भूतपूर्व अध्यक्ष। 1934 - लल्लन प्रसाद व्यास, भारत के जाने-माने समाज सुधारक थे। 1945 - माधवराव सिंधिया - प्रसिद्ध कांग्रेसी नेता। ❇ 10 मार्च को हुए निधन 1959 - मुकुन्द रामाराव जयकर - प्रसिद्ध शिक्षाशास्त्री, समाजसेवक, न्यायाधीश, विधि विशारद तथा संविधानशास्त्रज्ञ थे। 1897 - सावित्रीबाई फुले - भारत के पहले बालिका विद्यालय की पहली प्रिंसिपल और पहले किसान स्कूल की संस्थापक।
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9 महीने पहले
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