#ऊं श्री सूर्याय नमः,भाष्कराय नमः 🙏🌹

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sn vyas
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#🌞जय सूर्यदेव भगवान🙏 शुभ रविवार🙏 ॐ सूर्याय नमः🌻🏕️ #ॐ सूर्याय नमःॐ ॐ आदित्याय नमः ॐ भास्कराय नमः 🌹🌹 `परोरजः सवितुर्जातवेदो देवस्य भर्गो मनसेदं जजान ।` `सुरेतसादः पुनराविष्ट चष्टे हंसं गृध्राणं नृषद्रिङ्गिरामिमः ॥` [ `श्रीमद्भागवतमहापुराण ५.७.१४` ] `अर्थात 👉🏻 "सर्वज्ञ सर्वशक्तिमान् कर्मफलदायक स्वप्रकाश सर्वेश्वर सूर्यका तेज प्रकृतिसे परे है । उसीने सङ्कल्पद्वारा इस सृष्टिकी संरचना की है । वही अन्तर्यामीरूपसे इसमें प्रविष्ट होकर अपनी चित्-शक्तिद्वारा सर्वविध प्राणियोंकी रक्षा करता है । हम उस बुद्धिप्रवर्तक तेजकी शरण हैं ॥"` `ॐ मित्राय नमः , ॐ रवये नमः , ॐ सूर्याय नमः ☀️` `श्लोक एवं चित्र का सामंजस्य –` `१. श्लोक का मर्म – परोरजः सवितुर्जातवेदः` `सूर्य का तेज "रजोगुण से परे" है – शुद्ध सत्त्व । वही "जातवेदः" है – सब प्राणियों के कर्म को जानने वाला । इसीलिए शनिदेव "कर्मफलदाता" हैं , क्योंकि वे सूर्य-पुत्र हैं –पिता का ही गुण पुत्र में परिलक्षित होता है ।` `२. छवि का दर्शन – सप्त-अश्व रथ – ☆सात छन्द , ☆सात रंग , ☆सात दिन , ☆सात लोक । एक-चक्र काल का प्रतीक ।` `अरुण सारथि –उषा का प्रतीक , बिना पैर के – कर्म करो , फल की गति मत देखो ।` `कमल-हस्त सूर्यदेव – लक्ष्मी के पिता , तेज तथा समृद्धि दोनों साथ ।` `अर्घ्य देता भक्त – यह "सुरेतसादः पुनराविष्ट" का प्रत्यक्ष स्वरूप है –सूर्य जल के माध्यम से घर-घर में प्रविष्ट होकर रक्षा करते हैं ।` `३. "हंसं गृध्राणं" का रहस्य – सूर्य "हंस" हैं – नीर-क्षीर विवेकी , परमहंसों के उपास्य ।` `वही "गृध्राणं" भी हैं – कालरूप , आयु को ग्रसने वाले ।` `इसीलिए गायत्री में "भर्गः" कहा – जो पाप को भर्जन करे , वही तेज धारण करने योग्य है ।` 🧘🏻‍♂️`जिस तेज ने सृष्टि रची , वही तेज आपकी बुद्धि में प्रकट हो ।` `यही "भर्ग" है , यही "सोऽहम्" है , यही "शिवोऽहम्" है ।` `ॐ भास्कराय विद्महे महाद्युतिकराय धीमहि तन्नो आदित्यः प्रचोदयात्🚩` `🌄🌄 प्रभात वन्दन 🌄🌄©®`
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