🖐हस्तरेखा
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हस्तरेखा 🖐🏽

*🚩 जय काल भैरव🚩* जन्म समय हाथ पर लिखा है *हथेली पर जन्म तारीख* *अपने जन्म का महिना और राशि को पता करने का नियम* दोनो हाथों की तर्जनी उंगलियों के तीसरे पोर और दूसरे पोर में लम्बवत रेखाओं को २३ से गुणा करने पर जो संख्या आये,उसमें १२ का भाग देने पर जो संख्या शेष बचती है,वही जातक का जन्म का महिना और उसकी राशि होती है,महिना और राशि का पता करने के लिये इस प्रकार का वैदिक नियम अपनाया जा सकता है 1 बैशाख-मेष राशि 2 ज्येष्ठ-वृष राशि 3 आषाढ-मिथुन राशि 4 श्रावण-कर्क राशि 5 भाद्रपद-सिंह राशि 6 अश्विन-कन्या राशि 7 कार्तिक-तुला राशि 8 अगहन-वृश्चिक राशि 9 पौष-धनु राशि 10 माघ-मकर राशि 11 फ़ाल्गुन-कुम्भ राशि 12 चैत्र-मीन राशि इस प्रकार से अगर भाग देने के बाद शेष 1 बचता है तो बैसाख मास और मेष राशि मानी जाती है और 2 शेष बचने पर ज्येष्ठ मास और वृष राशि मानी जाती है *पक्ष और दिन का तथा रात के बारे में ज्ञान करना* वैदिक रीति के अनुसार एक माह के दो पक्ष होते है,किसी भी हिन्दू माह के शुरुआत में कृष्ण पक्ष शुरु होता है और बीच से शुक्ल पक्ष शुरु होता है व्यक्ति के जन्म के पक्ष को जानने के लिये दोनों हाथों के अंगूठों के बीच के अंगूठे के विभाजित करने वाली रेखा को देखिये दाहिने हाथ के अंगूठे के बीच की रेखा को देखने पर अगर वह दो रेखायें एक जौ का निशान बनाती है तो जन्म शुक्ल पक्ष का और जन्म दिन का माना जाता है इसी प्रकार अगर दाहिने हाथ में केवल एक ही रेखा हो,और बायें हाथ में अगर जौ का निशान हो तो जन्म शुक्ल पक्ष का और रात का जन्म होता है अगर दाहिने और बायें दोनो हाथों के अंगूठों में ही जौ का निशान हो तो जन्म कृष्ण पक्ष रात का साधारणत: दाहिने हाथ में जौ का निशान शुक्ल पक्ष और बायें हाथ में जौ का निशान कृष्ण पक्ष का जन्म बताता है *जन्म तारीख की गणना* मध्यमा उंगली के दूसरे पोर में तथा तीसरे पोर में जितनी भी लम्बी रेखायें हों उन सबको मिलाकर जोड लें और उस जोड में 32 और मिला लें फ़िर 5 का गुणा कर लें और गुणनफ़ल में 15 का भाग देने जो संख्या शेष बचे वही जन्म तारीख होती है दूसरा नियम है कि अंगूठे के नीचे शुक्र क्षेत्र कहा जाता है इस क्षेत्र में खडी रेखाओं को गुना जाता है जो रेखायें आडी रेखाओं के द्वारा काटी गयीं हो,उनको नही गिनना चाहिये इन्हे 6 से गुणा करने पर और 15 से भाग देने पर शेष मिली संख्या ही तिथि का ज्ञान करवाती है यदि शून्य बचता है तो वह पूर्णमासी का भान करवाती है 15 की संख्या के बाद की संख्या को कृष्ण पक्ष की तिथि मानी जाती है *जन्म वार का पता करना* अनामिका के दूसरे तथा तीसरे पोर में जितनी लम्बी रेखायें हों उनको 517 से जोडकर 5 से गुणा करने के बाद 7 का भाग करदे जो संख्या शेष बचती है वही वार की संख्या होती है 1 से रविवार 2 से सोमवार तीन से मंगलवार और 4 से बुधवार इसी प्रकार शनिवार तक गिने जाते है *जन्म समय और लगन की गणना* सूर्य पर्वत पर तथा अनामिका के पहले पोर पर गुरु पर्वत पर तथा मध्यमा के प्रथम पोर पर जितनी खडी रेखायें होती है उन्हे गिनकर उस संख्या में 811 जोडकर 124 से गुणा करने के बाद 60 से भाग करदे भागफ़ल जन्म समय घंटे और मिनट का होता है योगफ़ल अगर 24 से अधिक का है तो 24 से फ़िर भाग कर ले इस तरह से कोई भी अपने जन्म समय को ज्ञात सकता है 💐🙏🏻
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1 साल पहले
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