अगर मैं प्रधानमंत्री होता
अगर में प्रधान मंत्री होता ! दुनिया के सबसे बड़े गणतंत्र के सभी नागरिकों को मेरा प्रणाम । यह (हमारा गणतंत्रिक होना) सबसे बड़ा अभिमान है और भारत जैसे diverse देश को चलने के लिए हमारा गणतंत्रिक होना बहुत ज़रूरी है । ख़ैर गणतंत्र है क्या ? गण का तंत्र, यानी जनता के हाथ power । में गर प्रधान मंत्री होता तो इस गणतंत्रिक पद्धति की सुरक्षा मेरा पहला लक्ष्य होता । सभी नागरिकों के पास समान अधिकार, और सभी को इस अधिकार का एहसास हो ये सुनिस्चित करवाता । में अभी भी जनता को अपील करता हूँ की यह महसूस करें की सत्ता किसी राजनैतिक पार्टी या संस्था के पास नहीं , सत्ता आपके पास है । आपके अपने मुट्ठी में । आख़िरकार सिस्टम कौन है ? कश्मीर से कन्यकुमारी तक फैले बस विशाल ज़मीन का एक टुकड़ा या मैं, आप और हम सब भारतवाशी हैं । धन्यवाद @मनोज यादव "सुरेंद्र" @Ravikant Gupta @Swara @DHAru #अगर मैं प्रधानमंत्री होता
अगर मैं प्रधानमंत्री होता | Essay on If I were the Prime Minister 👇👇👇👇👇 हमारे देश की गणतंत्रात्मक शासन व्यवस्था में कोई भी नागरिक प्रधानमंत्री बन सकता है । प्रधानमंत्री वही बनता है, जो आम चुनाव के फलस्वरूप लोकसभा में बहुमत प्राप्त दल का नेता होता है । राष्ट्रपति उसे ही प्रधानमंत्री पद के लिए आमंत्रित करते हैं और उससे अपनी सरकार बनाने का आग्रह करते हैं । इससे स्पष्ट है कि प्रधानमंत्री बनना आसान काम नहीं है । उस जिम्मेदारी का सफलतापूर्वक निर्वाह करने का दृढ़ संकल्प करते हुए यदि मैं प्रधानमंत्री होना स्वीकार कर लेता हूँ तो मैं अपने अधिकारों का उपयोग किस प्रकार करूँगा, यह मैं बता देना चाहता हूँ । प्रधानमंत्री बनने पर मेरे सामने जो प्रथम कार्य है, वह है मंत्रिपरिषद् का गठन । मैं अपनी मंत्रिपरिषद् का गठन करने में बहुत सावधानी बरतूँगा । मैं उसमें ऐसे व्यक्तियों को स्थान दूँगा, जो व्यक्तिगत और दलीय स्वार्थों से ऊपर हों, निष्पक्ष हों, न्यायप्रिय हों, सच्चे जनसेवी हों, कार्य-कुशल हों, अपने देश की ज्वलंत ममस्याओं से भली-भाँति परिचित हों और जातीय, प्रांतीय तथा सांप्रदायिक भावनाओं के शिकार न हों । मैं अपनी मंत्रिपरिषद् के प्रत्येक मंत्री की कार्य- प्रणाली पर पैनी दृष्टि रखूँगा और यदि कोई अपने कर्तव्यों के पालन में ढिलार्ड करता हुआ पाया जाएगा तो मैं उसे अपनी मंत्रिपरिषद् से हटाने में संकोच नही करूँगा । इस प्रकार का कड़ा रुख अख्तियार करने से ही मैं जनता का विश्वासपात्र वन सकूँगा और घूसखोरी, चोरबाजारी आदि से जनता की रक्षा कर सकूँगा । मेरा दूसरा काम होगा- देश की सैनिक शक्ति में वृद्धि करना और उसे युद्ध के आधुनिकतम अस्त्र-शस्त्रों से सुसज्जित करना । अहिंसा में विश्वास करते हुए भी मैं अपने देश को निर्बल बनाने की नीति का समर्थक नहीं हूँ । अपनी सैनिक शक्ति बढ़ाने और हर तरह के अस्त्र-शस्त्रों का संग्रह करने का अर्थ यह नहीं है कि मैं चीन अथवा पाकिस्तान से युद्ध के नारे लगाता रहूँगा । मैं किसी देश पर आक्रमण नहीं करूँगा; किंतु यदि कोई देश मुझे ललकारेगा और मेरे देश पर आक्रमण करेगा तो मैं अहिंसा की आड़ लेकर चुपचाप नही बैठूँगा । मैं उसे ऐसी शिकस्त दूँगा कि फिर कभी मेरे राष्ट्र की ओर कुदृष्टि रखने का दुःसाहस न कर सके । प्रधानमंत्री होने पर मेरा तीसरा काम होगा अपने देश को स्वावलंबी, आत्मनिर्भर और धन- धान्य से संपन्न बनाना । इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए मैं सबसे पहले कृषि की उन्नति पर ध्यान दूँगा । खेती की सर्वागीण उन्नति के लिए मैं किसानों की भरपूर सहायता करूँगा । मैं उन्हें वैज्ञानिक ढंग से खेती के लिए शिक्षा दिलाऊँगा । उनके खेतों की सिंचाई के लिए समुचित प्रबंध करूँगा । #अगर मैं प्रधानमंत्री होता
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#अगर मैं प्रधानमंत्री होता
अगर मैं प्रधानमंत्री होता!!! फर्ज कीजिये, आप देश के प्रधानमंत्री है। लाल किले में खड़े 15 अगस्त के भाषण के लिए खड़े हैं और पूरा देश आपको सुन रहा है। आप क्या बोलते ? बताइये अपनी इन विचारों को। देश के विकास का क्या राह हो, क्या बदलाव चाहते हैं आप देश के लिए। अपनी इन सारें भावनाओं को अपने दोस्तों के साथ #अगर मैं प्रधानमंत्री होता टैग में | #अगर मैं प्रधानमंत्री होता
संसार का प्रत्येक व्यक्ति आत्मोन्नति की कामना को अपने मन में संजोए रखता है। मैंने भी प्रधानमन्त्री बनने का सपना अपने मन में पाल रखा है। मैं यही चाहता हूँ की भारत संसार के सबसे शक्तिशाली, गौरवशाली और वैभवशाली देशों में गिना जाए। यह सपना तभी सच हो सकता है, जब देश में प्रगति और उन्नति का वातावरण मौजूद हो। इसके लिए वर्तमान व्यवस्था में परिवर्तन होना जरुरी है। मैं सोचता हूँ की यदि मुझे देश की व्यवस्था के संचालन का अवसर प्राप्त हुआ, तो मेरा पहला कदम यह होगा की मैं भारत की राष्ट्रभाषा हिंदी को वास्तविक मायनों में देश की राजभाषा बनाऊंगा और गैर हिंदी भाषी राज्यों में भी इसके प्रयोग को प्रोत्साहन दूंगा। बिना अपनी भाषा को अपनाए संसार का कोई भी देश प्रगति नहीं कर सकता। देश की धरोहर : संविधान सभा के अनुसार, केंद्र की भाषा एकमात्र हिंदी होगी। विभिन्न प्रदेशों में प्रादेशिक भाषाएँ मान्य होंगी। प्रादेशिक सरकारें आपस में तथा केंद्र से हिंदी में ही पत्राचार करेंगी। विश्वविद्यालयों, उच्च न्यायालयों तथा सर्वोच्च न्यायालय की भाषा हिंदी होगी। भारत में सभी प्रकार की तकनीकी और गैर-तकनीकी शिक्षा देशी भाषाओं के माध्यम से ही दी जायेगी। मंत्रिमंडल के आकार में परिवर्तन : मैं मंत्री मण्डल का आकार बहुत ही सीमित रखूँगा। योग्यता संपन्न, ईमानदार, चरित्रवान और देशभक्त लोगों को ही मंत्रिमंडल में शामिल किया जाएगा। प्रदेशों में भी ऐसा ही किया जाएगा। राजनीति से परिवारवाद का उन्मूलन कर दिया जाएगा जिससे सभी को चुनाव लड़ने का सामान अधिकार मिल सके। भारत के बारे में मेरी कल्पना : मैं चाहता हूँ की प्रशासनिक अधिकारी जनता का शासक या शोषक न होकर उसे जनता का सेवक बनाया जाए। विदेशों में स्थित भारतीय दूतावासों में योग्य व कुशल लोगों को ही नियुक्त किया जाएगा जिससे वे देश की विदेश नीति का कुशलता से कार्यान्वन कर सकें। उनसे आशा की जायेगी की वे विदेशों में अपने देश के लिए कार्य करें। प्रदेशों में भी प्रशासन को पुनर्गठित किया जाएगा। भारत के गौरव के अनुकूल उन्हें जनता को कठोरता से दबाने या कुचलने के लिए नहीं, बल्कि उनकी सेवा के लिए तैयार किया जाएगा। #अगर मैं प्रधानमंत्री होता
*अगर मैं प्रधानमंत्री होता!!! फर्ज कीजिये, आप देश के प्रधानमंत्री है। लाल किले में खड़े 15 अगस्त के भाषण के लिए खड़े हैं और पूरा देश आपको सुन रहा है। आप क्या बोलते ? बताइये अपनी इन विचारों को। देश के विकास का क्या राह हो, क्या बदलाव चाहते हैं आप देश के लिए। अपनी इन सारें भावनाओं को कमेंट कर बताये @GOLD #अगर मैं प्रधानमंत्री होता
अगर मैं प्रधानमंत्री होता!!! फर्ज कीजिये, आप देश के प्रधानमंत्री है। लाल किले में खड़े 15 अगस्त के भाषण के लिए खड़े हैं और पूरा देश आपको सुन रहा है। आप क्या बोलते ? बताइये अपनी इन विचारों को। देश के विकास का क्या राह हो, क्या बदलाव चाहते हैं आप देश के लिए। अपनी इन सारें भावनाओं को अपने दोस्तों के साथ #अगर मैं प्रधानमंत्री होता टैग में | #अगर मैं प्रधानमंत्री होता