*_निश्छल प्रेम की परिभाषा_*
```न कोई बंधन, न कोई वादा,
बस कान्हा के मन में बसी है राधा।
यमुना के तट पर मुरली की वो तान,
जिसमें खो बैठा सारा गोकुल अपना भान।
राधा के चरणों की धूल है चंदन,
कृष्ण के हृदय का वही है वंदन।
प्रेम अगर प्रश्न है, तो उत्तर है राधा,
पूर्ण अगर कृष्ण हैं, तो आधार है राधा।
बिना फेरों के भी जो अटूट रिश्ता कहलाया,
सारे जग ने उन्हें 'राधे-कृष्ण' के नाम से सजाया।
मीरा की भक्ति मिली, रुक्मणी का साथ मिला,
पर कान्हा के हृदय में सदा राधा का ही नाम खिला।```
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#🙂সনাতন ধর্ম🙏 #🙂ভক্তির সকাল😇 #😀পজেটিভ স্টোরি😀 #🙏Have a Good Day #🥰জয় শ্রীকৃষ্ণ🙏
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