बरसात का मौसम शुरू ही हुआ था। कॉलेज की छुट्टियाँ चल रही थीं और चार दोस्त—आरव, निखिल, समीर और करण—घूमने का प्लान बना रहे थे। शहर की भीड़ और शोर से दूर उन्हें किसी ऐसी जगह जाना था जहाँ रोमांच भी हो और कुछ नया देखने को भी मिले। काफी खोजबीन के बाद उन्हें पहाड़ों के बीच बसे एक पुराने जंगल के बारे में पता चला। स्थानीय लोग कहते थे कि वहाँ एक बहुत पुराना रास्ता है जो किसी नक्शे में नहीं मिलता।
चारों दोस्तों को यह बात सुनकर और ज्यादा उत्सुकता हुई। अगले ही दिन वे अपनी बाइक लेकर जंगल की ओर निकल पड़े। सुबह का समय था, मौसम सुहाना था और रास्ते भर हंसी-मजाक चलता रहा। दोपहर तक वे जंगल के किनारे पहुँच गए। वहाँ एक छोटी-सी चाय की दुकान थी। दुकान चलाने वाला बूढ़ा आदमी उन्हें देखकर बोला, “घूमने आए हो तो घूमो, लेकिन शाम होने से पहले वापस लौट आना। जंगल के अंदर एक पुराना रास्ता है, उस तरफ मत जाना।”
निखिल हँस पड़ा। “आजकल भी लोग ऐसी बातें मानते हैं क्या?”
बूढ़े ने कोई जवाब नहीं दिया। उसने बस उनकी ओर कुछ सेकंड तक देखा और फिर धीरे से कहा, “हर चेतावनी अंधविश्वास नहीं होती बेटा।”
चारों दोस्त आगे बढ़ गए। शुरुआत में सब कुछ सामान्य था। ऊँचे-ऊँचे पेड़, पक्षियों की आवाज़ें और ठंडी हवा। लेकिन लगभग एक घंटे बाद उन्हें एक संकरा रास्ता दिखाई दिया जो जंगल के और भीतर जा रहा था। अजीब बात यह थी कि वह रास्ता उनके मोबाइल के नक्शे में नहीं दिख रहा था।
आरव ने कहा, “यही होगा वह रास्ता जिसके बारे में बूढ़ा बता रहा था।”
करण ने हँसते हुए कहा, “तो फिर चलो, असली एडवेंचर यहीं से शुरू होता है।”
वे चारों उस रास्ते पर चल पड़े। जैसे-जैसे वे आगे बढ़ते गए, जंगल और घना होता गया। पेड़ों की शाखाएँ इतनी फैली हुई थीं कि सूरज की रोशनी भी मुश्किल से जमीन तक पहुँच रही थी। कुछ देर बाद उन्हें एहसास हुआ कि आसपास पक्षियों की आवाज़ें भी बंद हो चुकी हैं। पूरा जंगल अजीब-सी खामोशी में डूबा हुआ था।
करीब आधे घंटे बाद उन्हें एक टूटा हुआ पत्थर का दरवाज़ा दिखाई दिया। ऐसा लग रहा था जैसे कभी वहाँ कोई पुरानी बस्ती रही हो। दरवाज़े पर काई जमी हुई थी और उसके पास एक लकड़ी का बोर्ड पड़ा था, जिस पर लिखे शब्द लगभग मिट चुके थे।
समीर ने मोबाइल निकालकर फोटो लेने की कोशिश की, लेकिन उसका फोन अचानक बंद हो गया। हैरानी की बात यह थी कि बाकी तीनों के फोन भी उसी समय बंद हो गए। जबकि कुछ मिनट पहले तक उनकी बैटरी पूरी थी।
अब पहली बार सबके चेहरे पर चिंता दिखाई दी।
“चलो वापस चलते हैं,” आरव ने कहा।
लेकिन जब वे मुड़े तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई।
जिस रास्ते से वे आए थे, वह वहाँ था ही नहीं।
पीछे सिर्फ घने पेड़ थे।
चारों दोस्तों ने अलग-अलग दिशाओं में रास्ता ढूँढने की कोशिश की, लेकिन हर तरफ एक जैसा जंगल दिखाई दे रहा था। धीरे-धीरे शाम होने लगी और अंधेरा फैलने लगा। तभी दूर कहीं किसी के चलने की आवाज़ सुनाई दी।
टक... टक... टक...
ऐसा लग रहा था जैसे कोई लकड़ी की छड़ी लेकर धीरे-धीरे उनकी ओर आ रहा हो।
सबने एक-दूसरे की तरफ देखा। जंगल में उनके अलावा कोई नहीं होना चाहिए था।
आवाज़ और करीब आने लगी।
अचानक पेड़ों के बीच उन्हें एक बूढ़ा आदमी दिखाई दिया। उसके सफेद बाल थे, हाथ में पुरानी लालटेन थी और चेहरा अजीब तरह से शांत था।
“रास्ता भटक गए?” उसने पूछा।
चारों ने राहत की सांस ली।
“हाँ बाबा, हमें बाहर जाने का रास्ता चाहिए।”
बूढ़े ने कुछ सेकंड तक उन्हें देखा और फिर बोला, “मेरे पीछे आओ। लेकिन पीछे मुड़कर मत देखना, चाहे कुछ भी सुनाई दे।”
बात अजीब थी, लेकिन उनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं था।
वे उसके पीछे चलने लगे। जंगल में घना अंधेरा था। सिर्फ लालटेन की रोशनी ही रास्ता दिखा रही थी। तभी अचानक पीछे से किसी के रोने की आवाज़ आने लगी। फिर किसी बच्चे की हँसी सुनाई दी। कभी ऐसा लगता जैसे कोई उनका नाम पुकार रहा हो।
निखिल कई बार पीछे देखने ही वाला था, लेकिन हर बार बूढ़े की बात याद आ जाती।
लगभग बीस मिनट तक चलते रहने के बाद अचानक सामने रोशनी दिखाई दी।
वे जंगल के किनारे पहुँच चुके थे।
कुछ दूर वही चाय की दुकान दिखाई दे रही थी।
चारों ने राहत की सांस ली और बूढ़े को धन्यवाद कहने के लिए पीछे मुड़े...
लेकिन वहाँ कोई नहीं था।
न बूढ़ा आदमी।
न लालटेन।
न पैरों के निशान।
डर के मारे वे दौड़ते हुए चाय की दुकान तक पहुँचे और सारी बात बूढ़े दुकानदार को बता दी।
उनकी कहानी सुनकर बूढ़ा कुछ देर चुप रहा। फिर उसने दुकान के अंदर रखी एक पुरानी तस्वीर निकाली।
तस्वीर देखते ही चारों के चेहरे का रंग उड़ गया।
तस्वीर में वही लालटेन वाला बूढ़ा आदमी था।
“ये कौन हैं?” आरव ने काँपती आवाज़ में पूछा।
दुकानदार ने गहरी सांस ली।
“ये मेरे दादा थे। जंगल के रक्षक माने जाते थे। तीस साल पहले इसी जंगल में उनकी मौत हो गई थी...”
चारों दोस्तों के हाथ-पैर सुन्न पड़ गए।
उस दिन के बाद उन्होंने कभी उस जंगल का रुख नहीं किया।
लेकिन आज भी जब बरसात की रातों में उस जंगल के पास से कोई गुजरता है, तो कई लोगों को पेड़ों के बीच एक लालटेन जलती हुई दिखाई देती है...
मानो कोई अब भी भटके हुए लोगों को सही रास्ता दिखा रहा हो। 🌲🏮😨
सीख:
हर रहस्य डरावना नहीं होता। कुछ रहस्य ऐसे भी होते हैं जो हमें बचाने के लिए मौजूद रहते हैं।
पाठकों से निवेदन 🙏
मेरे प्रिय पाठकों मै एक लेखक हूं और हिंदी कहानियां एवं साहित्य लिखता हूँ, मेरा काम सिर्फ कहानियां लिखना नहीं बल्कि उनके द्वारा लोगों को शिक्षा देना भी है..
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