CBI vs CBI
दिल्ली की वो काली रात, जब शतरंज की तरह बदलते रहे CBI के मोहरे मंगलवार की देर रात केंद्रीय सर्तकता आयुक्त ने एक अहम बैठक बुलाई. बैठक में सभी आला अधिकारियों के साथ कोरम पूरा किया गया. अधिकारी जानते थे कि मामला सीबीआई की आपसी रार से जुड़ा है। देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई में घमासान मचा हुआ है. भ्रष्टाचार का जिन्न बोतल से बाहर क्या निकला कि CBI के दो टॉप अफसर आमने-सामने आ गए. आरोप प्रत्यारोप का दौर शुरू हुआ. अब तक इस मामले में खामोश बैठी मोदी सरकार को आखिरकार सख्त कदम उठाना पड़ा. मंगलवार की देर रात सीवीसी के आला अफसरों की एक बैठक बुलाई गई. जिसके खत्म होते ही विवादित अधिकारी आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना को छुट्टी पर जाने का फरमान सुना दिया गया. सबसे बड़ी जांच एजेंसी में निदेशक और विशेष निदेशक की आपसी लड़ाई में रिश्वतखोरी का बड़ा मामला उजागर हुआ. पोल खुल जाने के बाद दोनों आला अफसर एक दूसरे के दुश्मन बन बैठे. सरकार पहले तमाशा देखती रही और फिर एक्शन में आ गई. मंगलवार की रात इस पूरे एक्शन की गवाह बन गई. हुआ यूं कि मंगलवार की देर रात केंद्रीय सर्तकता आयुक्त ने एक अहम बैठक बुलाई. बैठक में सभी आला अधिकारियों के साथ कोरम पूरा किया गया. अधिकारी जानते थे कि मामला सीबीआई की आपसी रार से जुड़ा है. लिहाजा सभी अफसर टाइम से बैठक में जा पहुंचे. केंद्रीय सर्तकता आयुक्त (सीवीसी) खुद पहले से वहां मौजूद थे. सीबीआई के मुद्दे का तनाव उनके चेहरे पर भी साफ झलक रहा था. सभागार में सीवीसी के सभी अफसर मौजूद थे. बैठक में सीबीआई में चल रही उठा पटक को लेकर बातचीत शुरू हुई. आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना एक दूसरे पर जो इल्जाम लगा रहे थे, उनकी फेहरिस्त सबके सामने थी. सबसे बड़ा मामला था जांच को निष्पक्ष कराने का. लिहाजा, इस लंबी बैठक के बाद तय हुआ कि दोनों विवादित अधिकारियों को एजेंसी से दूर किया जाए. लिहाजा, रात के 11 बजे आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना को छुट्टी पर भेज देने का फैसला लिया गया. ताकि मामले की जांच सही और निष्पक्ष तरीके से की जा सके. साथ ही दोनों अधिकारियों के दफ्तर और दस्तावेज सील किए जाना तय हुआ।
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1 साल पहले
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