हदीस
*╭┅❏━━───•❍❍•──━━❏┅╮* * 🖊करामत🖊* *╰┅❏━━──👇👇•──━━❏┅╯* *हज़रत सय्यदना जुनैद बग़दादी रज़ियल्लाहु तआला अन्हु एक मर्तबा दरियाये दज्ला पर या अल्लाह या अल्लाह कहते हुए मिस्ल ज़मीन के चलने लगे,तभी एक शख्स आया,उसे भी पार जाने की ज़रुरत थी मगर वहां कश्ती कोई ना थी,जब उसने हज़रत को जाते देखा तो कहा कि मुझे भी साथ लेते चलिये,आपने उससे कहा या जुनैद या जुनैद कह और साथ चल,उसने या जुनैद या जुनैद कहा और पानी पर चलने लगा,बीच रास्ते उसे शैतान ने बहका दिया कि खुद तो या अल्लाह या अल्लाह कहते हैं और मुझसे या जुनैद या जुनैद कहलवाते हैं,लिहाज़ा उसने या जुनैद छोड़कर या अल्लाह कहना शुरू किया और फौरन डूबने लगा,तो चिल्लाया कि हज़रत बचाइये,आपने फरमाया कह या जुनैद या जुनैद,जैसे ही उसने या जुनैद कहना शुरू किया फिर से पानी पर चलने लगा,तब हज़रत जुनैद बग़दादी रज़ियल्लाहु तआला अन्हु फरमाते हैं कि ऐ नादान अभी तू जुनैद तक तो पहुंचा नहीं और खुदा तक पहुचंने की हवस रखता है_* *📕 अलमलफूज़,हिस्सा 1,सफह 94* *📕 महफिले औलिया,सफह 179* *सबक़-आज भी बहुत सारे लोग नबी या वली के वसीले के बग़ैर खुदा तक पहुचंने की कोशिश मे लगे हैं मगर जिस तरह वो बग़ैर वसीला पानी मे गर्क हुआ वैसे ही ये भी जहन्नम मे गर्क हो जायेंगे और अगर दुनिया से बग़ैर वसीले के चला गया तो फिर वहां कोई बचाने वाला भी ना होगा* *करामत* - *_हज़रत खालिद बिन वलीद रज़ियल्लाहु तआला अन्हु ने मक़ामे हीरह में लश्कर के साथ पड़ाव किया,एक ईसाई पादरी अपने साथ एक खास किस्म का ज़हर जो कि बहुत खतरनाक था लेकर हज़रत की बारगाह में हाज़िर हुआ,हज़रत खालिद बिन वलीद रज़ियल्लाहु तआला अन्हु ने उससे वो ज़हर लिया और उसके सामने ही बिस्मिल्लाह शरीफ पढ़कर खा गए जब ये मंज़र उस ईसाई पादरी ने देखा तो तो अपनी क़ौम से कहा कि जो इंसान ज़हर खाकर भी ज़िन्दा खड़ा हो तो उससे जंग करना बहुत बड़ी बेवकूफी होगी लिहाज़ा भलाई इसी में है कि इनसे जंग ना करके बल्कि सुलह कर ली जाए और फिर एक बहुत बड़ा जुज़िया देकर ईसाईयों ने सुलह की,ये वाक़िया हज़रत अबू बक्र रज़ियल्लाहु तआला अन्हु की खिलाफत में पेश आया_* *📕 करामाते सहाबा,सफह 106* *सबक़- अगर चे ये बिस्मिल्लाह शरीफ की बरकत है मगर आज हम हज़ारहां बार बिस्मिल्लाह पढ़ते हैं मगर नुक्सान उठाते हैं आखिर क्यों,क्योंकि हम सिर्फ ज़बान से ही अल्लाह का ज़िक्र करते हैं दिल से नहीं और ज़बान भी ऐसी कि जिसे दुनिया भर की खुराफात बकते रहते हैं तो फिर क्यों उस ज़बान में तासीर हो कि कुछ पढ़ने पर फ़ायदा करे और उन नुफ़ूसे क़ुदसिया को देखिये कि उनका ज़ाहिर उनका बातिन उनका जिस्म उनकी रूह उनका दहन उनका सुखन सब कुछ ख़ुदा के ज़िक्र में महव था,बेशक अल्लाह के कलाम में बेशुमार रहमतें और बरकतें छिपी हुई हैं मगर उनसे फायदा उठाने के लिए पहले हमें खुद को बदलना होगा तब इन शा अल्लाह हर वो काम होगा जिसके बारे में बयान हुआ*
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5 महीने पहले
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