🚩 ~ Aaj ka Vedic Hindu पंचांग ~ 🚩
✍️ By Astro Vastu Kosh 🚩
💥 Akshay Jamdagni ✍️
🌤️ दिनांक - 13 अगस्त 2026
🌤️ दिन - गुरूवार
🌤️ विक्रम संवत - 2083
🌤️ शक संवत - 1948
🌤️ अयन - दक्षिणायन
🌤️ ऋतु - वर्षा ॠतु
🌤️ मास - श्रावण (शुक्ल पक्ष)
🌤️ पक्ष - शुक्ल (श्रावण शुक्ल प्रतिपदा)
🌤️ तिथि - प्रतिपदा सायं 08:41 तक, तत्पश्चात द्वितीया (14 अगस्त प्रातः तक)
🌤️ नक्षत्र - अश्लेषा प्रातः 06:06 तक, तत्पश्चात मघा (14 अगस्त प्रातः 04:39 तक)
🌤️ योग - वरीयान दोपहर 12:16 तक, तत्पश्चात परिघ
🌤️ सूर्योदय - 05:49
🌤️ सूर्यास्त - 07:02
👉 दिशाशूल - दक्षिण दिशा में
⏱️ शुभ-अशुभ समय व काल
🌤️ राहुकाल - दोपहर 02:05 से शाम 03:44 तक
🌤️ यमगण्ड काल - प्रातः 05:49 से प्रातः 07:28 तक
🌤️ गुलिक काल - प्रातः 09:07 से प्रातः 10:46 तक
🌤️ अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 11:59 से दोपहर 12:52 तक
🌤️ विजय मुहूर्त - दोपहर 02:51 से दोपहर 03:43 तक
🌤️ गणमूल नक्षत्र - अश्लेषा केवल प्रातः 06:06 तक (गणमूल), तत्पश्चात मघा (गणमूल नहीं)
🚩 व्रत पर्व विवरण - श्रावण शुक्ल प्रतिपदा (सावन मास का प्रथम दिन)
💥 विशेष -
श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि है। इस दिन भगवान विष्णु, शिव और माता लक्ष्मी की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है।
प्रतिपदा तिथि सायं 08:41 तक रहेगी, तत्पश्चात द्वितीया तिथि प्रारंभ होगी।
अश्लेषा नक्षत्र केवल प्रातः 06:06 तक है, उसके बाद मघा नक्षत्र पूरा दिन और अगली सुबह 04:39 तक रहेगा।
दिशाशूल दक्षिण दिशा में है, अतः इस दिशा में यात्रा से बचें।
चतुर्मास के दिनों में ताँबे व काँसे के पात्रों का उपयोग न करके अन्य धातुओं के पात्रों का उपयोग करना चाहिए। (स्कन्द पुराण)
चतुर्मास में पलाश के पत्तों की पत्तल पर भोजन करना पापनाशक है।
🌷 श्रावण में रुद्राभिषेक करने का महत्व 🌷
"रुद्राभिषेकं कुर्वाणस्तत्रत्याक्षरसङ्ख्यया, प्रत्यक्षरं कोटिवर्षं रुद्रलोके महीयते। पञ्चामृतस्याभिषेकादमृत्वम् समश्नुते।।"
🙏🏻 श्रावण में रुद्राभिषेक करने वाला मनुष्य उसके पाठ की अक्षर-संख्या से एक-एक अक्षर के लिए करोड़-करोड़ वर्षों तक रुद्रलोक में प्रतिष्ठा प्राप्त करता है। पंचामृत का अभिषेक करने से मनुष्य अमरत्व प्राप्त करता है।
🌷 श्रावण मास में भूमि पर शयन 🌷
"केवलं भूमिशायी तु कैलासे वा समाप्नुयात" - स्कन्दपुराण
🙏🏻 श्रावण मास में भूमि पर शयन करने से मनुष्य कैलाश में निवास प्राप्त करता है।
🌷 पार्थिव शिवलिंग 🌷
🙏🏻 जो पार्थिव शिवलिंग का निर्माण कर एकबार भी उसकी पूजा कर लेता है, वह दस हजार कल्प तक स्वर्ग में निवास करता है, शिवलिंग के अर्चन से मनुष्य को प्रजा, भूमि, विद्या, पुत्र, बान्धव, श्रेष्ठता, ज्ञान एवं मुक्ति सब कुछ प्राप्त हो जाता है | जो मनुष्य 'शिव' शब्द का उच्चारण कर शरीर छोड़ता है वह करोड़ों जन्मों के संचित पापों से छूटकर मुक्ति को प्राप्त हो जाता है |'
🙏🏻 कलियुग में पार्थिव शिवलिंग पूजा ही सर्वोपरि है।
कृते रत्नमयं लिंगं त्रेतायां हेमसंभवम्
द्वापरे पारदं श्रेष्ठं पार्थिवं तु कलौ युगे (शिवपुराण)
🙏🏻 शिवपुराण के अनुसार पार्थिव शिवलिंग का पूजन सदा सम्पूर्ण मनोरथों को देनेवाला हैं तथा दुःख का तत्काल निवारण करनेवाला है |
🌷 पार्थिवप्रतिमापूजाविधानं ब्रूहि सत्तम ॥
येन पूजाविधानेन सर्वाभिष्टमवाप्यते ॥
🙏🏻 अग्निपुराण के अनुसार
🌷 त्रिसन्ध्यं योर्च्चयेल्लिङ्गं कृत्वा विल्वेन पार्थिवम् ।
शतैकादशिकं यावत् कुलमुद्धृत्य नाकभाक् ।। ३२७.१५ ।। अग्निपुराण
🙏🏻 जो मनुष्य प्रतिदिन तीनों समय पार्थिव लिङ्ग का निर्माण करके बिल्वपत्रों से उसका पूजन करता है, वह अपनी एक सौ ग्यारह पीढ़ियों का उद्धार करके स्वर्गलोक को प्राप्त होता है।
🙏🏻 स्कंदपुराण के अनुसार
प्रणम्य च ततो भक्त्या स्नापयेन्मूलमंत्रतः॥
ॐहूं विश्वमूर्तये शिवाय नम॥
इति द्वादशाक्षरो मूलमंत्रः॥ ४१.१०२ ॥
🙏🏻 "ॐ हूं विश्वमूर्तये शिवाय नमः" यह द्वादशाक्षर मूल मंत्र है। इससे शिवलिंग को स्नान कराना चाहिए।
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