राकेश कुमार
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अधिक मास को पुरुषोत्तम मास अथवा मलमास के नाम से भी जाना जाता है। हिन्दू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक 32 मास 16 दिन के पश्चात् एक अतिरिक्त मास जुड़ता है। यह मास भगवान विष्णु को समर्पित है, अतः इसे सर्वाधिक पवित्र माना गया है।
इस मास में किये गए दान, पूजन, व्रत का फल कई गुना अधिक प्राप्त होता है।
अधिक मास में क्या करना चाहिए - पूजन, पाठ, व्रत के नियम
1. पूजन-पाठ के नियम
भगवान विष्णु का पूजन: प्रतिदिन प्रातःकाल स्नान कर पीत वस्त्र धारण करें। भगवान विष्णु अथवा श्रीकृष्ण को पीत पुष्प, तुलसी, चंदन, कदली फल, पीत मिष्ठान्न अर्पित करें।
मंत्र जप: "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का न्यूनतम 108 बार जप करें। विष्णु सहस्रनाम, पुरुषोत्तम माहात्म्य का पाठ अत्यंत शुभ है।
दीप दान: प्रतिदिन सायंकाल तुलसी के समीप, नदी तट पर अथवा मंदिर में घृत का दीप प्रज्ज्वलित करें। मान्यता है कि इससे समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं।
श्रीमद्भागवत कथा: सम्पूर्ण मास श्रीमद्भगवद्गीता अथवा श्रीमद्भागवत पुराण का श्रवण/पठन सर्वोत्तम है।
2. व्रत के नियम
एक समय भोजन: अधिक मास में एक समय लवण रहित भोजन करने का विधान है। सादा सात्त्विक आहार ग्रहण करें।
फलाहार व्रत: एकादशी, पूर्णिमा, अमावस्या पर व्रत रखना सहस्र गुना फलदायी होता है।
मौन व्रत: सप्ताह में एक दिन मौन व्रत धारण करने से मन शांत होता है।
ब्रह्मचर्य: इस सम्पूर्ण मास ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।
3. दान के नियम
अधिक मास को दान का मास कहा जाता है। इस मास में दिया गया दान कभी क्षय नहीं होता।
अन्न दान: निर्धनों को भोजन कराना सर्वश्रेष्ठ दान है।
वस्त्र दान: पीत वस्त्र, धोती-कुर्ता, साड़ी का दान करें।
दीप, उपानह, छत्र दान: ग्रीष्म ऋतु में छत्र, जल का घट, उपानह दान करना शुभ है।
गो दान: संभव हो तो गो सेवा अथवा गौ हेतु चारा दान करें।
4. क्या न करें - वर्जित कार्य
अधिक मास में केवल ईश्वर भक्ति करनी चाहिए। अतः इन कार्यों का निषेध किया गया है:
शुभ कार्य न करें: विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण, नवीन वस्तु क्रय, नवीन व्यापार आरंभ करना वर्जित है।
तामसी भोजन: प्याज, लहसुन, मांस, मदिरा का सेवन न करें।
कटु वचन: असत्य, क्रोध, चुगली, निंदा से बचें।
केश/नख न काटें: एकादशी, पूर्णिमा के दिन केश और नख काटना निषिद्ध है।
सबसे सरल नियम
यदि सम्पूर्ण नियमों का पालन न कर सकें तो केवल 3 कार्य कर लें:
प्रतिदिन "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" का जप
एक समय सादा भोजन
यथाशक्ति दान
कब से कब तक है?
वर्ष 2026 में अधिक मास 17 मई से 15 जून तक रहेगा। यह ज्येष्ठ मास का अधिक मास होगा।
कहा जाता है कि अधिक मास में की गई भक्ति सीधे भगवान विष्णु तक पहुँचती है और समस्त कष्ट दूर करती है।
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