🎂हैप्पी बर्थडे जावेद अख्तर
Friends ek nazm janab Javed Akhter sahib ki kalm se aaz ke mahaul pe कुछ तुमने कहा कुछ मैंने कहा और बढ़ते बढ़ते बात बढ़ी दिल ऊब गया दिल डूब गया और गहरी काली रात बढ़ी तुम अपने घर हम अपने घर सारे दरवाज़े बंद किये बैठे हैं कड़वे घूँट पिए ओढ़े हैं गुस्से की चादर कुछ तुम सोचो कुछ मैं सोचूँ क्यूँ ऊंची हैं दीवारें कब तक हम इन पर सर मारें कब तक यह अँधेरे रहने हैं कीना के यह घेरे रहने हैं कीना = द्वेष चलो अपने दरवाज़े खोलें और घर के बाहिर आएं हम दिल ठहरे जहाँ है बरसों से वो एक नुक्कड़ है नफरत का कब तक इस नुक्कड़ पैर ठहरें अब इसके आगे जाएँ हम बस थोड़ी दूर एक दरिया है जहाँ एक उजाला बहता है वाँ लहरों लहरों हैं किरणे और किरणों किरणों हैं लहरें इन किरणों मैं इन लहरों मैं हम दिल को खूब नहाने दें सीनों मैं जो एक पत्थर है उस पत्थर को घुल जाने दें दिल के कोने मैं एक छुपी गर थोड़ी सी भी नफरत है उस नफरत को धुल जाने दें दोनों की तरफ से जिस दिन भी इज़हार नदामत का होगा नदामत = लज्जा तब जश्न मुहब्बत का होगा जावेद अख्तर साहिब
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7 महीने पहले
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