जैन धर्म 🙏
🙏देवाधिदेव प्रथम तीर्थंकर श्रीऋषभदेवजी की स्तुति🙏 ❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️ 🌹(25) जिनेन्द्र देव में अन्य देवों के नाम की सिध्दि🌹 💙💙💙💙💙💙💙💙💙💙💙💙💙 बुध्दस्त्वमेव विबुधार्चित-बुद्धि-बोधात्, त्वं शंकरोSसि भुवनत्रय-शंकरत्वात् । धाताSसी धीर! शिवमार्ग-विधेर्विधानाद , व्यक्तं त्वमेव भगवन् पुरुषोत्तमोSसि ।। 🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷 भावार्थ:- इस काव्य में आचार्य श्री ने श्रीऋषभदेवजी को बुद्ध, शंकर, ब्रम्हा और पुरुषोत्तम कहा है। श्रीऋषभदेवजी में बुध्दि (ज्ञान) का पूर्ण विकास हुआ है अतः उन्हें बुध्द कहा गया है। श्रीऋषभदेवजी तीन लोक के जीवों का "शम" अर्थात कल्याण करनेवाले होने से उन्हें शंकर कहा गया है। रत्नत्रय रूप मोक्षमार्ग की विधि के विधाता अर्थात उपदेष्टा होने से श्रीऋषभदेवजी को ब्रम्हा कहा जाता है। संसार के समस्त भक्तों के मन में व्यक्त रूप होने से एवं ज्ञान के द्वारा सब कुछ जानने से वे सच्चे विष्णु है। समस्त पुरुषों में श्रेष्ठ होने से श्रीऋषभदेवजी को पुरुषोत्तम कहा गया है। इस काव्य को पढ़ने से बच्चों की नजर अच्छी और दृष्टिदोष दूर हो जाते हैं। अग्नि का प्रभाव कम हो जाता है और शत्रुओं के हाथ से शस्त्र भी नीचे गिर जाते हैं। 🌸🌼🌸🌼🌸🌼🌸🌼🌸🌼🌸🌼🌸🌼🌸🌼 #जैन धर्म 🙏
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2 महीने पहले
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