Gita gyan

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Swami Shri Shrijee Maharaj
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कृते यद्ध्यायतो विष्णुं त्रेतायां यजतो मखैः। द्वापरे परिचर्यायां कलौ तद्धरिकीर्तनात्॥ (भागवत 12.3.52) सतयुग में ध्यान, त्रेतायुग में यज्ञ, द्वापर में पूजा से जो फल मिलता था, कलियुग में वही हरि-कीर्तन से मिलता है। कलियुग में नाम संकीर्तन का बहुत महत्व है, इसीलिए नाम संकीर्तन पर जोर डालें । श्रीजी महाराज #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇 #🙏गीता ज्ञान🛕
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