🎬मूवी क्लिप & फ़िल्म ट्रेलर
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मूवी क्लिप & फ़िल्म ट्रेलर

फ़िल्म समीक्षा - # मुल्क " - Rishi kapoor और तापसी पन्नू अभिनीत एक फिल्म आई है - "Mulk - मुल्क " बड़े-बड़े विद्वान समीक्षक इसे बेहतरीन फिल्म बता रहे हैं और सबों को , विशेषकर हिन्दुओं को देखने की सलाह दे रहे हैं... ज्ञान तो पुराना ही है , बस पैकेजिंग नयी और आकर्षक बनाने की कोशिश की गई है... - 1. मुस्लिमों ने भारत को अपना घर मानकर हिन्दुओं पर बहुत बड़ा उपकार किया है । हिन्दुओं को इसके लिए मुस्लिमों का सदा कृतज्ञ रहना चाहिए... 2. मुस्लिम परिवारों के लिए हिन्दू बहुएं बहुत अच्छी होती हैं... ( वैसे मुस्लिम परिवारों के लिए हिन्दू दामाद कभी अच्छा नहीं होता..) 3. शाहिद द्वारा बम फोड़े जाने से मारे गए 16 लोगों की घटना को सामान्य घटना मानी जानी चाहिए.. बहुसंख्यकों द्वारा अत्यधिक सताए जाने के कारण प्रतिक्रियास्वरूप ही कोई शाहिद बम फोड़ने जैसा सामान्य भूल करता है... जबकि शाहिद के अब्बू की हिरासत के दौरान हुई बीमारी से मौत,, बहुत बड़ा मुद्दा है और समाज तथा सिस्टम पर सवाल पैदा करने वाला है... 4. मुस्लिमों द्वारा बम फोड़े जाने पर धर्म को बीच में लाना ठीक नहीं... लेकिन माता का जगराता असंवैधानिक है,, क्योंकि इसी वजह से शाहिद का परिवार उसके मरते हुये अब्बू से वक़्त पर मिलने नही पहुंच पाता... 5. चौबे उपनाम वाले जिस धर्म से सम्बन्ध रखते हैं , उस धर्म के व्यक्ति अत्यधिक संकीर्ण मानसिकता के होते हैं.. जबकि दलितों से मुस्लिमों को और मुस्लिमों को दलितों अत्यधिक प्यार और भरोसा होता है... 6. हिन्दू अत्यधिक अत्याचारी होते हैं... उन्हें आतंकी शाहिद के परिवार को सवालों भारी नजर से देखने का कोई हक़ नही है... बल्कि उसका तो फूल मालाएं पहना कर स्वागत करना चाहिए था... 7. यह हमारा सौभाग्य है कि मुस्लिम हमारे साथ , हम हिन्दुओं के साथ इस देश में रह रहे हैं । यदि मुस्लिम भारत-भूमि का त्याग कर देंगे , तो यह भूमि नापाक हो जाएगी और अल्लाह इस नापाक भूमि को नष्ट कर देगा... 8. इसी फिल्म में बकील अनिता मोहम्मद सवाल करती है कि - "शाहिद के अब्बू का जनाजा उठाने तक मुहल्ले से कोई नही आता.." ( जबकि फ़िल्म में ही चौथा कंधा एक हिन्दू का ही होता है..) यहाँ डायरेक्टर सिन्हा को याकूब मेमन और बुरहान वानी जैसे सैकड़ों जनाजे भूल जाते हैं जिसमे हज़ारों/लाखों की संख्या में लोग बल्कि कहिये मुसलमान शामिल हुये हैं... ~ मतलब ये की विपक्ष के एजेंडे को पूरी तरह शूट करती फ़िल्म... 2019 में सम्भावित हार को देखते हुए "हिन्दू मुस्लिम एकता" और "दलित मुस्लिम में परस्पर सहयोग" का पुराना कार्ड खेला गया है... जिसमे खलनायक तो ब्राह्मण को ही होना है... जैसा कि सालों से भांडवुड सॉरी बॉलीवुड की परंपरा रही है.....
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1 साल पहले
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