शुभ कामनाएँ 🙏
2K Posts • 439K views
गणतंत्र दिवस गणतन्त्र दिवस (गणतंत्र दिवस) भारत का एक राष्ट्रीय पर्व है जो प्रति वर्ष 26 जनवरी को मनाया जाता है। इसी दिन सन् 1950 को भारत सरकार अधिनियम (1935) को हटाकर भारत का संविधान लागू किया गया था। एक स्वतन्त्र गणराज्य बनने और देश में कानून का राज स्थापित करने के लिए संविधान को 26 नवम्बर 1949 को भारतीय संविधान सभा द्वारा अपनाया गया और 26 जनवरी 1950 को इसे एक लोकतान्त्रिक सरकार प्रणाली के साथ लागू किया गया था। यह भारत के तीन राष्ट्रीय अवकाशों में से एक है, अन्य दो स्‍वतन्त्रता दिवस और गांधी जयंती हैं भारत को आजादी भले ही 15 अगस्त 1947 को मिली लेकिन 26 जनवरी 1950 को भारत पूर्ण गणराज्य बना. इसी दिन को पूरा भारत गणतंत्र दिवस के रूप में मनाता है. संविधान 26 नवंबर 1949 में पूरी तरह तैयार हो चुका था लेकिन दो महीने इंतजार करने के बाद इसे 26 जनवरी 1950 को लागू किया था। संविधान लागू करने के लिए 26 जनवरी की तारीख को इसलिए चुना गया क्योंकि साल 1930 में 26 जनवरी को देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में इंडियन नेशनल कांग्रेस ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ 'पूर्ण स्वराज' का ऐलान किया था। भारत के गणतंत्र की यात्रा कई सालों पुरानी है, जो 1930 में शुरू हुई थी. जिसके बाद सन 1930 से 15 अगस्त 1947 तक पूर्ण स्वराज दिवस यानी 26 जनवरी को ही स्वतत्रंता दिवस मनाया जाता था। #शुभ कामनाएँ 🙏
14 likes
15 shares
महा नन्दा नवमी महानंदा नवमी एक शुभ हिंदू त्योहार है जो 'माघ', 'भाद्रपद' और 'मार्गशीर्ष' के महीनों के दौरान 'शुक्ल पक्ष' (चंद्रमा के उज्ज्वल पखवाड़े की अवधि) के 'नवमी' (9 वें दिन) को मनाया जाता है। पारंपरिक हिंदू कैलेंडर। यह तिथि ग्रेगोरियन कैलेंडर में क्रमशः जनवरी-फरवरी, अगस्त-सितंबर और दिसंबर के महीनों से मेल खाती है। इसके अलावा, महानंदा नवमी कुछ अन्य हिंदू चंद्र महीनों के दौरान भी मनाई जाती है। इस दिन मुख्य अनुष्ठान में गंगा और यमुना जैसी पवित्र नदियों में स्नान करके शुद्धिकरण शामिल है। हिंदू भक्त इस 'शुक्ल पक्ष नवमी' पर देवी दुर्गा की पूजा करते हैं। महानंदा नवमी जिसे 'ताला नवमी' भी कहा जाता है, भारत के उत्तरी और पूर्वी राज्यों, विशेष रूप से उड़ीसा और पश्चिम बंगाल में अत्यधिक उत्साह और उत्साह के साथ मनाया जाता है। महानंदा नवमी का त्योहार हिंदू भक्तों के लिए बहुत धार्मिक महत्व रखता है। इस दिन की पूजा की मुख्य देवता देवी दुर्गा हैं। हिंदू किंवदंतियों के अनुसार, देवी दुर्गा शक्ति और ऊर्जा की प्रतीक हैं। नंदा देवी की अराधना प्राचीन काल से ही होती चली आ रही है. नंदा को नवदुर्गाओं में से एक बताया गया है. भाद्रपद कृष्ण पक्ष की नवमी तथा शुक्ल पक्ष की नवमी को नन्दा कहा जाता है. साल में तीन अवधियों में दुर्गा पूजा की जाती है. भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की नवमी महानंदानवमी के रुप में जानी जाती है. अष्टमी को उपवास रखा जाता है तथा नवमी के दिन भगवान शिव और देवी नंदा की पूजा की जाती है. जागरण किया जाता है तथा भोग लगाया जाता है, नवमी के दिन चण्डिका पूजन से नंदानवमी व्रत संपूर्ण होता है.धर्म ग्रंथों एवं लोक कथाओं मे नन्दा देवी की के बखान का वर्णन किया गया है. नन्दा देवी की महिमा का वर्णन का प्रमाण धार्मिक ग्रंथों व पुराणों में मिलता है. मां भगवती की छ: अंगभूता देवियों में नंदा देवी को स्थान प्राप्त है. विष्णु पुराण अनुसार नौ दुर्गाओं का उल्लेख मिलता है जिनमें देवी महालक्ष्मी, हरसिद्धी, क्षेमकरी, शिवदूती, महाटूँडा, भ्रामरी, चंद्रमंडला, रेवती एवं नन्दा देवी प्रमुख हैं. इसी के साथ शिवपुराण में शक्ति रुप में नंदा देवी हिमालय में स्थपित व पूजित हैं. नंदादेवी देवी को शक्ति रूप व सौंदर्य से युक्त देवी मना जाता है. नवमी के दिन देवी मां नन्दा देवी की उपासना मुख्य रुप से कि जाती है. नंदा नवमी के उपलक्ष्य पर अनेक स्थानों पर नंदा देवी के सम्मान में मेलों का आयोजन किया जाता है. नंदाष्टमी को कोट की माई का मेला और नैतीताल में नंदादेवी मेला प्रमुख हैं जुडे हुए हैं. अल्मोड़ा नगर में स्थित ऐतिहासिकता नंदादेवी मंदिर में हर साल भाद्र मास की शुक्ल पक्ष की अष्टमी को मेला लगता है जो बहुत ही भव्य एवं रौनक से भरा होता है यहां धार्मिक मान्यताओं की सुंदर झलक दिखती है. #शुभ कामनाएँ 🙏
17 likes
21 shares