आयुर्वेद

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sn vyas
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#आयुर्वेद #💁🏻‍♀️घरेलू नुस्खे #🌿दादी नानी के नुस्खे #🌿आयुर्वेदिक नुस्खों पर चर्चा आयुर्वेद में मुलेठी जैसी कई औषधीय वनस्पतियाँ वर्णित हैं जो घर की रसोई या बग़ीचे में सरलता से उपलब्ध होती हैं, परंतु उनके गुण असाधारण होते हैं। ऐसी ही एक मीठे स्वाद वाली, बहुगुणी औषधि है — मुलेठी। संस्कृत में इसे 'यष्टिमधु' कहा जाता है, जिसका अर्थ है — 'मीठी लकड़ी'। इसका स्वाद जितना मीठा, गुण उतने ही गहरे। मुलेठी का परिचय (Introduction in Ayurveda): संस्कृत नाम: यष्टिमधु, मधुक वानस्पतिक नाम: Glycyrrhiza glabra गुणधर्म: रस (स्वाद): मधुर वीर्य (ताकत): शीत (शीतल प्रकृति) विपाक: मधुर दोषों पर प्रभाव: वात-पित्त शामक धातु एवं प्रणाली पर प्रभाव: स्वर, कंठ, श्वसन, अमाशय, त्वचा, मूत्र प्रणाली मुलेठी के मुख्य लाभ (Major Ayurvedic Benefits): गला और स्वर सुधारे (Throat & Voice Enhancer): मुलेठी का काढ़ा या चूर्ण गुनगुने पानी के साथ लेने से गले की खराश, सूजन, और आवाज की रूकावट में तुरंत आराम मिलता है। श्वसन तंत्र का रक्षक (Respiratory Healer): कफ निकालने में सहायक, ब्रोंकाइटिस, अस्थमा व खांसी में मुलेठी बेहद लाभकारी है। पाचन क्रिया मजबूत करे (Improves Digestion): अपच, अम्लपित्त (Acidity), गैस, और अल्सर जैसी समस्याओं में यह अमृत समान कार्य करता है। तनाव निवारक और ताजगीदायक (Stress Reliever): इसके नियमित सेवन से शरीर में कोर्टिसोल संतुलित रहता है। मानसिक थकान और तनाव में यह सहायक है। त्वचा रोगों में उपयोगी (Skin Disorders): मुलेठी का लेप त्वचा की सूजन, एलर्जी, खुजली, झाइयाँ व मुहाँसों में उपयोगी है। प्रजनन क्षमता बढ़ाए (Fertility & Reproductive Health): स्त्रियों में हार्मोन संतुलन, मासिक धर्म की अनियमितता, व बांझपन में सहायक। यकृत (लीवर) की रक्षा करे (Liver Protective): हेपेटाइटिस व जिगर की सूजन में इसका उपयोग लाभकारी सिद्ध हुआ है। मुलेठी के घरेलू नुस्खे (Home Remedies with Mulethi): गले की खराश के लिए: मुलेठी पाउडर + शहद मिलाकर चाटें दिन में 2-3 बार। कफ और खांसी में: मुलेठी, अदरक और तुलसी का काढ़ा बनाकर दिन में दो बार लें। अम्लपित्त (Acidity) में: 1/2 चम्मच मुलेठी चूर्ण + 1 कप ठंडा दूध, दिन में 1-2 बार लें। त्वचा की जलन या एलर्जी में: मुलेठी पाउडर + चंदन + गुलाब जल का लेप करें। नींद न आने की समस्या: रात को दूध में मुलेठी मिलाकर पीने से मन शांत होता है और नींद अच्छी आती है। सेवन की विधि एवं मात्रा (Dosage & Use): मुलेठी चूर्ण: 1–3 ग्राम तक मुलेठी काढ़ा: 10 ग्राम मुलेठी को 1 कप पानी में उबालें, जब आधा बचे तो सेवन करें मुलेठी का अर्क: 5–10 मिली, जल में मिलाकर सेवन का समय: भोजन के बाद या आवश्यकतानुसार चिकित्सकीय सलाह से मुलेठी के नुकसान व सावधानियाँ (Precautions & Side Effects): अत्यधिक मात्रा में या लंबे समय तक लेने से ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है। गर्भवती स्त्रियाँ बिना डॉक्टर की सलाह के इसका सेवन न करें। अधिक सेवन से सूजन, सिरदर्द या जल प्रतिधारण (Water Retention) हो सकती है। आयुर्वेदिक ग्रंथों में उल्लेख (Classical References): चरक संहिता में इसे 'कंठ्य', 'श्वासहर', 'वात-पित्त शामक' बताया गया है। भावप्रकाश निघण्टु में इसे "दीपन, रसायन, स्वर्य, त्वच्य, मूत्रल और रक्तपित्तहर" कहा गया है। अन्य उपयोगी आयुर्वेदिक योग जहाँ मुलेठी मुख्य घटक है: कंठसुधारक वटी यष्टिमधु घृत मूलकादी क्वाथ मुलेठी चूर्ण पंचतिक्त घृत (त्वचा के लिए) निष्कर्ष...... मुलेठी एक ऐसी जड़ी-बूटी है जो ना केवल आपके किचन की शोभा बढ़ाती है बल्कि आपके शरीर की भी रक्षा करती है। आयुर्वेद में इसे अमृत तुल्य माना गया है। सही मात्रा, सही समय और सही विधि से इसका प्रयोग करें और जीवन को रोगमुक्त बनाएं।।। #डॉ0_विजय_शंकर_मिश्र:।।
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