माँ कि दुवा

103 Posts • 553K views
sn vyas
520 views 13 hours ago
#मां #मां दुर्गा `#शरणागति – माँ ललिता का दिव्य प्रमाण🌹` _*श्रीब्रह्माण्डमहापुराण , उत्तरभाग , ललितोपाख्यान , अध्याय – ४१.७१-७७* _अगस्त्य मुनि ने पूछा –_ *शरणागतशब्दस्य कोऽर्थो वद हयानन ।* *वत्सं गौरिव यं गौरी धावन्तमनुधावति ॥७१॥* `हयग्रीव भगवान ने कहा –` *यः पुमानखिलं भारमैहिकामुष्मिकात्मकम् ।* *श्रीदेवतायां निक्षिप्य सदा तद्गतमानसः ॥७२॥* *सर्वानुकूलः सर्वत्र प्रतिकूलविवर्जितः ।* *अनन्यशरणो गौरीं दृढं सम्प्रार्थ्य रक्षणे ॥७३॥* *रक्षिष्यतीति विश्वासस्तत्सेवैकप्रयोजनः ।* *वरिवस्यातत्परः स्यात्सा एव शरणागतिः ॥७४॥* `भावार्थ 👉🏻 जो मनुष्य अपने ऐहिक-आमुष्मिक समस्त भार को श्रीलिता देवी पर छोड़कर , सर्वथा उनके अनुकूल रहकर , अनन्य शरण होकर "माँ अवश्य रक्षा करेंगी" – इस विश्वास के साथ उनकी सेवा में तत्पर रहता है – वही शरणागत है ।` *यदा कदाचित्स्तुतिनिंदनादौ निंदन्तु लोकाः स्तुवतां जनो वा ।* *इति स्वरूपं सुधिया समीक्ष्य विषादखेदौ न भजेत्प्रपन्नः ॥७५॥* `भावार्थ 👉🏻 शरणागत स्तुति-निंदा में सम रहता है । वह जानता है लोग क्या कहें , मुझे केवल माँ से प्रयोजन है ।` *अनुकूलस्य संकल्पः प्रतिकूलस्य वर्जनम् ।* *रक्षिष्यतीति विश्वासो गोप्तृत्ववरणं तथा ॥७६॥* *आत्मनिक्षेपकार्पण्ये षड्विधा शरणागतिः ।* `भावार्थ 👉🏻 शरणागति के ६ अंग हैं – १. अनुकूल संकल्प , २. प्रतिकूल का त्याग , ३. रक्षा का विश्वास , ४. गोप्तृत्व वरण , ५. आत्मनिक्षेप , तथा ६ .कार्पण्य ।` *अङ्गीकृत्यात्मनिक्षेपं पञ्चांगानि समर्पयेत् ।* *न ह्यस्य सदृशं किंचिद्धक्तिमुक्त्योस्तु साधनम् ॥७७॥* `भावार्थ 👉🏻 अपनी ५ इन्द्रियों सहित स्वयं को माँ को समर्पित कर देना । भक्ति औऱ मुक्ति का इससे बड़ा कोई साधन नहीं ।` `🎯 सार –` `वत्स/बछड़े के पीछे दौड़ती गौ के समान श्रीलिता माँ अपने शरणागत के पीछे दौड़ती हैं ।` `😊 अब सरल रूप से समझें शरणागत कौन है?` *जो अपने* `सांसारिक एवं परलोक के सारे भार` *माँ ललिता को सौंप दे ।* *तदोपरान्त हर पल मन माँ में लगाकर , "माँ रक्षा करेंगी" इस* `अटल विश्वास` *के साथ उनकी सेवा में लग जाए ।* `☝🏻 शरणागति के ६ अंग सरलता से जानें –` `१. अनुकूलस्य संकल्प: 👉🏻 जो माँ को प्रिय हो वही करने का संकल्प ।` `२. प्रतिकूलस्य वर्जनम् 👉🏻 जो माँ को अप्रिय हो उसका त्याग करना ।` `३. रक्षिष्यतीति विश्वासः 👉🏻 "माँ अवश्य रक्षा करेंगी" – ये दृढ़ विश्वास होना ।` `४. गोप्तृत्ववरणम् 👉🏻 माँ को ही अपना सर्वस्व मानना ।` `५. आत्मनिक्षेपः 👉🏻 स्वयं को सम्पूर्णतः माँ के आधीन कर देना ।` `६. कार्पण्यम् 👉🏻 "माँ मैं अकेला कुछ नहीं कर सकता" – ये विनम्र भाव रखना ।` *🪷 शरणागत की २ विशेष लक्षण –* `१. स्तुति-निंदा में सम 👉🏻 सँसार चाहे स्तुति करे अथवा निंदा , उसे कोई अंतर नहीं पड़ता । उसे तो केवल माँ से प्रयोजन है ।` `२. सम्पूर्ण समर्पण 👉🏻 अपनी ५ इंद्रियों सहित स्वयं को माँ को अर्पण कर देना ।` *वत्सं गौरिव* `– जैसे गाय अपने बछड़े के पीछे भागती है , वैसे ही माँ ललिता अपने शरणागत के पीछे दौड़ती हैं ।` `भेद त्यागो , अभेद अपनाओ ।` `शिव व शक्ति एक ही हैं ।` `ललिताम्बिकायै नमः🌺` `श्रीविद्यायै नमः🌸` `त्रिपुरसुन्दर्यै नमः🌹` `श्रीमात्रे नमः🚩` `श्रीकाल्यै नमः🚩` `श्रीतारायै नमः🚩` `श्रीत्रिपुरायै नमः🚩` `श्रीभुवनेश्वर्यै नमः🚩` `श्रीअम्बिकायै नमः🚩` `श्रीदुर्गापरमेश्वर्यै नमः🚩` `नमश्चण्डिकायै🚩` `श्रीदक्षिणामूर्तये नमः🚩` `शिव शिव शिव शिव शिव🚩` `हर हर शङ्कर🚩` `जय जय शङ्कर🚩` `🌄🌄 प्रभात वन्दन 🌄🌄` `© सर्वाधिकार सुरक्षित । सर्वज्ञ शङ्कर🚩 चैनल` `#प्रभातवन्दन` `#सर्वज्ञशङ्कर` `#आदिअनादि_अनंतशिवहर` `#शरणागति` `#लितोपाख्यान` `#ब्रह्माण्डपुराण` `#श्रीविद्या` `#हयग्रीव_अगस्त्य_संवाद` `#षडंग_शरणागति` `#माँ_ललिता`
24 likes
12 shares