Vishal
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माँ चंद्रघंटा की पावन कथा 🌺
नवरात्रि के तीसरे दिन माँ दुर्गा के तीसरे स्वरूप माँ चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। इन्हें शक्ति, साहस और शांति की देवी माना जाता है।
उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उनसे विवाह किया। विवाह के समय माता पार्वती ने अपने मस्तक पर अर्धचंद्र के आकार की घंटी धारण की। इसी कारण उनका नाम माँ चंद्रघंटा पड़ा।
माँ चंद्रघंटा का स्वरूप अत्यंत तेजस्वी और दिव्य है। वे सिंह पर सवार रहती हैं और उनके दस हाथों में विभिन्न अस्त्र-शस्त्र सुशोभित होते हैं।
जब संसार में दुष्ट शक्तियाँ और राक्षस अत्याचार करने लगे, तब माता ने अपने दिव्य और वीर स्वरूप से उनका सामना किया। मान्यता है कि उनकी घंटी की ध्वनि से नकारात्मक शक्तियाँ दूर हो जाती हैं और भक्तों के मन से भय समाप्त होता है।
माँ अपने भक्तों को साहस, आत्मविश्वास और शांति का आशीर्वाद देती हैं।
🌼 माँ चंद्रघंटा की पूजा का महत्व
🔱 भय और संकट से रक्षा की प्रार्थना की जाती है।
🙏 मन की शांति और आत्मविश्वास के लिए पूजा की जाती है।
🌺 परिवार में सुख-समृद्धि और मंगल की कामना की जाती है।
माँ चंद्रघंटा का मंत्र
ॐ देवी चंद्रघण्टायै नमः॥
जय माता दी! 🌺🔔 जय माँ चंद्रघंटा! #माँ का तिसरा रूप चंद्रघंटा #🙏माँ चंद्रघंटा #माँ चंद्रघंटा #माँ चंद्रघंटा
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