परमहंस परिव्राजकाचार्य श्रीमद् वासुदेवानंद सरस्वती (टेंबे) स्वामी महाराज चरित्र - श्री स्वामी महाराज का निराग्रही स्वभाव.
परमहंस परिव्राजकाचार्य श्रीमद् वासुदेवानंद सरस्वती (टेंबे) स्वामी महाराज राजनैतिक व्यवहारों में कभीभी गलत या बुरी सलाह नहीं देते थे। बढवाणी के राजा से उन्होंने कभीभी नहीं कहा के, “आप राज्य छोडकर अब केवल भजन ही किया करे।” वे राजा को अच्छे और सतर्क कर्तव्यपालन की ही सलाह दिया करते थे। बहुत सी महिलाएं श्रीक्षेत्र चिखलदा में (श्री स्वामी महाराज के दर्शन करने) आया करती थी। वे जब भी श्री दत्तप्रभू की सेवा करने की इच्छा प्रकट करती थी, श्री स्वामी महाराज उन्हें पति की सेवा करने को कहते थे और पाकगृह यानि रसोईघर में (सेवा करने) भेज देते थे। श्री स्वामी महाराज किसी को भी अपना धर्म या उपासना छोडने को नहीं कहते थे। श्री दत्तप्रभू की आराधना सब लोग करे, ऐसा आग्रह तो वे बिलकुल भी नहीं करते थे। एक ही परमात्मा अनेक रूपों में प्रकट हुए है, ऐसी श्री स्वामी महाराज की दृढ़ श्रद्धा थी।
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