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भक्त प्रह्लाद और होलिका की कथा यह परंपरा असुर राजा हिरण्यकशिपु, उसके पुत्र प्रह्लाद और बहन होलिका से जुड़ी है: अहंकार और भक्ति: हिरण्यकशिपु चाहता था कि सभी उसकी पूजा करें, लेकिन उसका पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का परम भक्त था। होलिका का वरदान: प्रह्लाद को मारने के लिए हिरण्यकशिपु ने अपनी बहन होलिका की मदद ली, जिसे वरदान प्राप्त था कि वह आग में नहीं जलेगी। दहन की घटना: होलिका प्रह्लाद को अपनी गोद में लेकर आग में बैठ गई। लेकिन भगवान की कृपा से होलिका जलकर भस्म हो गई और भक्त प्रह्लाद सुरक्षित बच गए। YouTube YouTube +4 2. आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व नकारात्मकता का अंत: होलिका की अग्नि को अहंकार, ईर्ष्या और नकारात्मक ऊर्जा को जलाने का माध्यम माना जाता है। शुद्धिकरण: मान्यता है कि होलिका पूजन से घर-परिवार में सुख-समृद्धि आती है और वातावरण शुद्ध होता है। ऋतु परिवर्तन: यह पर्व सर्दियों की समाप्ति और वसंत ऋतु के आगमन का भी संकेत देता है। Wikipedia Wikipedia +4 3. वैज्ञानिक दृष्टिकोण वैज्ञानिक रूप से, इस समय मौसम बदलने के कारण हवा में बैक्टीरिया और कीटाणुओं की संख्या बढ़ जाती है। होलिका दहन से उत्पन्न ताप वातावरण को शुद्ध करने और कीटाणुओं को नष्ट करने में सहायक माना जाता है। इस वर्ष (2026) होलिका दहन का शुभ मुहूर्त 3 मार्च को शाम 06:47 से 08:50 तक बताया जा रहा है। #viral #😊होली स्पेशल 🤘 #📝होली कोट्स 😊 #😊होलिका दहन मुहूर्त एवं कथाएं🙏🔥 #🎨होली सेलिब्रेशन 🤗

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5 दिन पहले