देश के नेतृत्व,
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में 'विकसित भारत २०४७' के विजन को राष्ट्र के सामने रखते हुए इसे एक जन-आंदोलन बनाने का आह्वान किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जिस तरह स्वाधीनता सेनानियों ने देश की आजादी के लिए अपना वर्तमान खपा दिया, उसी तरह आज हमें आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान देना होगा।
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भारत के प्रधान सेवक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी के अनुसार, जब 'राष्ट्र प्रथम' की भावना और नीति सर्वोपरि होती है, तब देश का हर नागरिक उन्नति के मार्ग पर प्रशस्त होता है। यह भाषण युवाओं में जोश भरते हुए उन्हें भारत को एक आत्मनिर्भर और समृद्ध राष्ट्र बनाने के लिए निरंतर काम करने की ऊर्जा प्रदान करता है।
जय हिन्द
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