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🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻 ■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■ ۞ஜ▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬ஜ۞۞ஜ *•• कल 17 मार्च 2026 (दिन मंगलवार) :- धन धन श्री गुरु हरिराय साहिब जी गुर-ता-गद्दी दिवस (गुरुगद्दी दिवस)* 🌻🌸🌻🌸🌻 ۞ஜ▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬ஜ۞۞ஜ ■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■ 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻 *•• प्यार से बोलिए धन धन श्री गुरु हरिराय साहिब जी* 🌹🌹🌹 *•• प्रिथम भगौती सिमरि कै गुरु नानक लई धिआइ* *फिर अंगद गुर ते अमरदासु रामदासै होई सहाइ* *अरजन हरगोबिंद नो सिमरौ स्री हरि राइ* *स्री हरि किशन धिआईऐ जिस डिठे सभि दुखि जाइ* *तेग बहादर सिमरिऐ घर नउ निधि आवै धाइ* *सभ थाई होइ सहाइ !!* *•• खूबु तेरी पगरी मीठे तेरे बोल* *द्वारिका नगरी काहे के मगोल !!* *•• आठ पहर आराधीए पूरन सतिगुर गिआनु !* *•• दुखु भंजनु तेरा नामु जी दुखु भंजनु तेरा नामु !!* *•• सम्मान जोग गुरु की साजी निवाजी गुरु खालसा रूप प्यारी साधसंगत जी , सातवे गुरु नानक जी धन धन श्री गुरु हरिराय साहिब जी का कल (मंगलवार :- 17 मार्च 2026) गुर-ता-गद्दी दिवस हैं जी -- सारी संगत से हाथ जोड़ कर विनती हैं कल के इस विशेष बड़े दिन अमृतवेला जरूर संभालिए और अमृतवेले उठ कर ज्यादा से ज्यादा श्री जपुजी साहिब जी के पाठ करे और पूरे दिन में ज्यादा से ज्यादा समय नाम सिमरन में दे जी !* *•• साधसंगत जी से हाथ जोड़ कर विनती :: अपने घर में सभी लोगो, अपने रिश्तेदारों और अपने सभी मित्रो से विनती करे कि कल (मंगलवार-- 17 मार्च 2026) के विशेष बड़े दिन पर अमृतवेले जरूर उठे और ज्यादा से ज्यादा श्री जपुजी साहिब जी के पाठ करे जी !* *•• साधसंगत जी जरूर पढ़े 👇👇 :- साखी (सच्ची घटना) :- प्रेम की मिसाल :- धन गुरु हरिराय साहिब जी और माई ताबो जी* 🙇‍♂️ *• संगत जी इतिहास में आया हैं कि धन गुरु हरिराय साहिब जी तख्त पर विराजमान हैं, गुरु हरिराय साहिब जी के सिर पर कलगी लगी हैं और सुंदर सी दसतार बंधी हुई हैं, संतो की लंबी लाइन लगी हुई हैं ; धन गुरु हरिराय साहिब जी का किरतपुर में दीवान लगा हुआ हैं, संगत दूर-दूर से आकर बेशकीमती पदार्थ चढ़ा रही हैं ; कोई सोने के सिक्के 🪙🪙 चढ़ा रहा हैं कोई खाने के बहुत बढ़िया बढ़िया पदार्थ चढ़ा रहे हैं, लाइन लगी हुई हैं और जो बड़े बड़े धनवान लोग हैं वो धन गुरु हरिराय साहिब जी को विनती कर रहे हैं कि पातशाह हमारे घर में चरण 👣 डालो, हमारे घर में भोजन खाओ और संगत को भी साथ में लेकर आओ, हम आप सभी की सेवा करेंगे ! धन गुरु हरिराय साहिब जी जिस पर प्रसन्न हो रहे हैं उन्हे तारीख दे रहे हैं कि हम आपके घर इस तारीख को आएँगे ! संगत जी धन गुरु हरिराय साहिब जी को हुकुम था कि 2,200 घुड़ सवार सैनिक हमेशा अपने साथ रखने हैं, इतने लोग तो हमेशा गुरु साहिब जी के साथ हमेशा साथ रहते थे और उसके अलावा संगत भी साथ में होती थी गुरु साहिब जी के , इतनी हज़ारों की तादाद मे संगत को तो धनवान लोग ही अपने घर में बुला सकते थे ! उसी समय जब धनवान लोगो को धन गुरु हरिराय साहिब जी तारीख दे रहे थे, एक गरीब बुढी माई जिसके कपड़े फटे हुए हैं जिसका कोई नहीं हैं ना पति, ना बेटा, हड्डिया निकली हुई हैं क्योंकि खाने को एक टाइम भी पूरा नहीं पड़ता और बिल्कुल अकेली रहती हैं ,वह बुढी माई पीछे दूर खड़े होकर धन गुरु हरिराय साहिब जी के दर्शन कर रही हैं ! धन गुरु हरिराय साहिब जी को देखते हुए दर्शन करते हुए वह बुढी माई मन ही मन रोये जा रही है और आँखों में आँसू हैं ; सोच रही हैं काश मैं भी धनवान होती और धन गुरु हरिराय साहिब जी को अपने घर पर बुलाती और मेरी तो झोपड़ी पूरी तरह टूटी हुई हैं, मैं गुरु साहिब जी को कहाँ लेकर जाऊँ ! वह बुढी माई रोज़ अपने घर से पैदल चलकर दरबार आती हैं क्योंकि उसकी कुटियाँ शहर से बाहर दूर जंगल में हैं और रोज़ दरबार के पीछे खड़े होकर गुरु साहिब जी के दर्शन करती हैं और यही खड़े होकर मन में विचार करके रोती हैं कि मैं कैसे गुरु साहिब जी को अपने घर लेकर जाऊँ ! वह बुढी माई डरकर आगे होकर गुरु साहिब जी को माथा तक नहीं टेकती कि कोई हाथ पकड़कर उसे पीछे ना करदे, क्योंकि गरीब आदमी घबराता हैं! बाणी भी कहती हैं :-* *" निरधन आदरु कोई न देइ "* *" लाख जतन करै ओहु चिति न धरेइ "* *• निर्धन को कोई आदर नही देता, वह लाख जतन करे लेकिन अमीर आदमी उस पर ध्यान नही देता, ये बात मनमुखो के लिए कही हैं, और जो गुरमुख होते हैं वो गरीबो को पहल देते हैं ! धन गुरु गोबिंद सिंह महाराज जी ने रहतनामे में इतनी सख्त पंक्तियाँ लिखी हुई हैं कि जो गरीबो को दुत्कारता हैं और अपने पास नही बैठाता उनको गुरु गोबिंद सिंह महाराज जी के दर्शन कभी नहीं होंगे ! अब ये बुढी माई उदास होकर चली जाती हैं और जब ये आज जाती हैं तो माई के मन में विचार आता हैं कि गुरु साहिब जी को गुरु गरीबनिवाज कहा जाता हैं :- ठीक हैं मैं गुरु साहिब जी को अपने घर में नही बुला सकती क्योंकि मेरी झोपड़ी टूटी हुई हैं इतने लोग कहाँ से आएँगे, पर मैं गुरु साहिब जी को कुछ अर्पण तो कर सकती हूँ, मैं गुरु साहिब जी को भोजन अपने घर में बुलाकर नही करवा सकती लेकिन मैं गुरु साहिब जी के लिए भोजन बनाकर तो ले जा सकती हूँ, तभी उस बुढी माई ने दो तीन दिन बुढे शरीर से कड़ी मेहनत करके अपना खाना छोड़कर एक टका बचाया और उस टके से थोड़ा सा आटा और नमक खरीद लिया ; अमृतवेले उठकर स्नान करके नाम जपते-जपते नमक डालकर दो आटे की रोटी बनाई! साफ कपड़े में दो नमक की रोटी लपेटकर गुरु साहिब जी को देने के लिए चल दी ! संगत जी उस बुढी माई ने जैसे ही घर से बाहर कदम रखा उसके मन में ये ख्याल आया कि :- तू क्या करने जा रही हैं, वहाँ पर लोग इतनी महँगी-महँगी मिठाइयां चढ़ाते हैं, तेरी नमक वाली रोटी को कौन देखेगा कौन खाएंगा और कौन पूछेगा ! बुढी माई ताबो के कदम रुक गए और सोच में पढ़ गई घबरा गई कि मुझे ये दो नमक की रोटी कौन दरबार में आगे लेकर जाने देगा और कौन गुरु साहिब जी को परोसने देगा, मुझे धक्के मारकर बाहर निकाल देंगे,ये सोच कर वह माई डर गई ! माई ताबो के कदम रुक गए और वह रोती रही और दूसरी तरफ धन गुरु हरिराय साहिब जी तख्त पर विराजमान हैं, गुरु साहिब जी के सामने अनगिनत बेशकीमती पदार्थ पढ़े हैं उसी समय धन गुरु हरिराय साहिब जी तख्त से खड़े होकर घोड़े पर सवार होकर चल पड़े ; 2,200 घुड़ सवार सैनिक तो तैयार ही खड़े थे ! धन गुरु हरिराय साहिब जी ने एडी मारी और घोड़ा दौड़ पड़ा और गुरु साहिब जी वहाँ पर जाने के लिए चल दिए जहाँ पर माई ताबो खड़ी हैं ! 2,200 घुड़ सवार सैनिक हैरान हैं कि आज गुरु साहिब जी बिना कुछ बताए चुप चाप चल दिए कुछ तो बड़ा कारण होगा, सारे सैनिक भी उसी समय गुरु साहिब जी के पीछे चल दिए ! माई ताबो ने देखा कि दूर से धूल उड़ती आ रही हैं इतने सारे घोड़े आ रहे हैं ; माई ताबो डरकर रास्ते से पेड़ के पीछे छिप गई कि कही मैं कुचली ना जाऊ ! धन गुरु हरिराय साहिब जी ने घोड़ा उसी पेड़ के पास रोक दिया जहाँ माई ताबो छिपी हुई थी ! धन गुरु हरिराय साहिब जी माई ताबो से कहने लगे कि :- माई भूख लगी हैं रोटी दे ! माई ताबो जी हैरान हैं उसे समझ नही आ रहा हैं कि गुरु साहिब जी परतख घोड़े पर सवार होकर उसे दर्शन दे रहे हैं और उसे कुछ सूझ नही रहा हैं गुरु साहिब जी को रोटी नही दे रही हैं ! धन गुरु हरिराय साहिब जी ने प्रेम से तीन बार कहा कि माई रोटी दे भूख लगी हैं, सेवादार ने भी माई ताबो का कंधा हिलाया कि गुरु साहिब जी रोटी माँग रहे हैं उन्हे रोटी दो! माई ताबो ने रोटी आगे करी और गुरु साहिब जी ने घोड़े पर बैठे ही, बिना नीचे जमीन पर उतरे खुद अपने हाथो से रोटी लिपटे हुए कपड़े में से निकाली और गुरु साहिब जी ने रोटी इस प्रकार खाई कि जैसे कई दिनों से कुछ खाया नही हो ! संगत जी माई ताबो जी गुरु साहिब जी के दर्शन करते हुए प्रेम में भीगकर यह कह रही हैं :- तू पापी मैं बख़्शनहार, कहना ये चाहिए था कि मैं पापी तू बख़्शनहार ; सेवादार ने जोर से माई ताबो को हिलाया कि क्या कह रही हैं माई जरा सोचके बोल ! गुरु साहिब जी ने सेवादार को कहा कि माई ताबो जी को कुछ मत बोलो, गुरु साहिब जी ने सेवादार को कहा कि तुम माई ताबो के लब्ज सुन रहे हो और मै माई के भीतर का सुन रहा हूँ, तुम माई ताबो की भावना देखो इसके बोल बेशकीमती हैं ,ये रोटी बेशकीमती हैं, ये अथाह प्रेम हैं , इस प्रेम की कोई कीमत नही हैं ! इतिहास में लिखा हैं कि जब गुरु साहिब जी अगले दिन घोड़े पर सवार होकर कही गए, तो सेवादार ने दोपहर के समय भोजन की थाली परोस दी और गुरु साहिब जी को घोड़े पर ही थाली दे दी ! धन गुरु हरिराय साहिब जी ने सेवादार को टोका कि भाई भोजन खाने की कोई मर्यादा होत हैं, भोजन आसन लगाकर बैठकर खाते हैं, भोजन की थाली घोड़े पर क्यों दे रहा हैं, सेवादार ने गुरु साहिब जी को कहा कि आपने कल भी तो माई ताबो जी के हाथ की बनी नमक की रोटी घोड़े पर ही बैठकर खाई थी ! गुरु साहिब जी ने कहा कि हर चीज की मर्यादा होती हैं प्रेम की नहीं, कल की बात ओर थी :- वो माई ताबो का प्रेम था, प्रेम सारी मर्यादाओं को तोड़कर बनता हैं और अब मैं बात कर रहा हूँ मर्यादा की!* *•• इसीलिए संगत जी कल के बड़े विशेष दिन पर अमृतवेला जरूर संभालिए और नाम जपकर धन गुरु हरिराय साहिब जी की अपार खुशियाँ प्राप्त करे जिससे गुरु साहिब जी हमारे अंदर भी एक प्रेम का तिनका डालकर अपना आशीर्वाद हमे प्रदान करे !!* *•• प्यार से बोलिए धन धन श्री गुरु हरिराय साहिब जी* 🙏🙏🙏 #वाहे गुरु श्री गुरु नानक देव जी🙏🏻

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1 दिन पहले