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(Beher-e-Ramal / Mutadarik) कहाँ तक मैं इन तन्हाइयों का सफ़र करूँ, अपने टूटे दिल की ख़ामोशी से कुछ असर करूँ। सुना है रात के आँचल में लाख रंग छिपते हैं, तो क्यों न मैं अपनी बंद पलकों से नज़र करूँ। मेरे भीतर कई टूटे ख़्वाब सोए हुए हैं, मैं कौन सा करूँ ज़िंदा, किसको खबर करूँ। हर मोड़ पे अब तक धुंधली राहें फैली हैं, कभी उतरा मैं ज़मीं पे—तो तेरे नाम शहर करूँ। नाकामियाँ पाल रखीं है अपने भीतर मैंने, ख़ुद को जलील करके फिर कैसे तेरा कदर करूँ। मेरी तन्हाई ने कभी नहीं छोड़ा मुझे अकेला, फिर भी डट के जीवन का जलता बसर करूँ। #💝 शायराना इश्क़ #📒 मेरी डायरी ##️⃣DilShayarana💘 #😞बेवफा शायरी #💔 हार्ट ब्रेक स्टेटस

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3 महीने पहले