ShareChat
click to see wallet page

सोमनाथ मंदिर भारत की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का प्रतीक है। लगभग एक हज़ार वर्ष पहले, ईस्वी सन् 1025 में महमूद ग़ज़नवी ने सोमनाथ पर पहला आक्रमण किया था। यह घटना केवल एक मंदिर पर किया गया हमला नहीं थी, बल्कि भारतीय संस्कृति और आस्था को तोड़ने का प्रयास थी। इस आक्रमण के दौरान मंदिर को भारी क्षति पहुँचाई गई, परंतु सोमनाथ की आत्मा कभी नहीं टूटी। इतिहास बताता है कि इस मंदिर को बार-बार ध्वस्त किया गया, लेकिन हर बार इसका पुनर्निर्माण हुआ। यही सोमनाथ की सबसे बड़ी विशेषता है—विनाश के बाद भी पुनर्जन्म। पहले हमले के एक हज़ार वर्ष पूरे होने पर सोमनाथ हमें यह संदेश देता है कि आस्था, स्वाभिमान और संस्कृति को हथियारों से नष्ट नहीं किया जा सकता। समय बदला, शासक बदले, लेकिन लोगों की श्रद्धा अडिग बनी रही। आज का सोमनाथ मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं है, बल्कि भारत के आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प का प्रतीक है। हज़ार वर्ष पहले हुए आक्रमण के बावजूद सोमनाथ आज भी गौरव के साथ खड़ा है और आने वाली पीढ़ियों को संस्कृति, सहनशीलता और स्वाभिमान की प्रेरणा देता रहेगा। #Educational

547 ने देखा
17 दिन पहले