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वो दिल नहीं रहा वो तबीअत नहीं रही शायद अब उन को मुझ से मोहब्बत नहीं रही जीने को जी रहे हैं तुम्हारे बग़ैर भी इस तरह जैसे जीने की हसरत नहीं रही घबरा रहा हूँ क्यों ये ग़म-ए-नारवा से अब क्या मुझ में ग़म के सहने की ताक़त नहीं रही हाँ ऐ 'मुफ़्लिस" हम ने ज़माने के दुख सहे फिर भी हमें किसी से शिकायत नहीं रही #😒दर्द भरी शायरी🌸 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #🖋कहानी: टूटे दिल की💔

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10 दिन पहले