देश के नेतृत्व,
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी ने अपने संबोधन में 2014 को भारत के लिए एक युगांतकारी मोड़ बताया है, जब देश ने गुलामी की मानसिकता को त्याग कर आत्म-गौरव के पथ पर चलना शुरू किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि 'रेस कोर्स रोड' का नाम बदलकर 'लोक कल्याण मार्ग' करना केवल नाम परिवर्तन नहीं, बल्कि सत्ता के अहंकार को 'सेवा भाव' में बदलने का एक बड़ा संकल्प था। आजादी के दशकों बाद भी देश में अपने वीर शहीदों और पुलिसकर्मियों के लिए कोई समर्पित स्मारक न होना औपनिवेशिक उपेक्षा का प्रतीक था, जिसे वर्तमान सरकार ने 'नेशनल वॉर मेमोरियल' और 'नेशनल पुलिस मेमोरियल' का निर्माण कर दूर किया है।
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भारत के प्रधान सेवक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी का यह दृष्टिकोण आधुनिक और विकसित भारत के निर्माण के लिए अपनी जड़ों पर गर्व करने और सेवा को ही सर्वोपरि धर्म मानने की प्रेरणा देता है।
जय हिन्द
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#✍️ विचार