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संज्ञानित कराना है कि योगी सरकार संविदा कर्मचारी निगम को लागू कर रही है, जिसमें संविदा कर्मचारियों को सम्मानजनक वेतन मिलेगा परन्तु ऊर्जा विभाग अपने संविदा/निविदा कर्मचारियों को 50 प्रतिशत कर रही है क्यों कि संविदा कर्मचारी निगम के प्रभावी होने पर उन्हें सरकार द्वारा तय वेतन देना पड़ेगा अब यह सोचने का समय है कि ई-ऑफिस, ई-डॉक, ई0आर0पी0 पोर्टल आदि ऑनलाइन कार्य करने हेतु कम्पनियों को तो अरबों का ठेका दे दिया लेकिन निविदा कर्मचारियों पर आने वाला कुछ लाख का खर्चा तो उन्हें भारी लग रहा है। यह भी सोचनीय है कि ऊर्जा विभाग 50 प्रतिशत निविदा कर्मचारी को कम कर रही है उसमें भी छटनी किसकी कर रही है जिसकी कोई सोर्स बड़े अधिकारी के सम्बन्धी है जो ज़बरदस्ती विभाग में घुसाए गए हैं या उनका जो इमानदार कर्मठ है यहां भी जीत नैतिकता मेहनत की होगी या अनैतिकता या बेइमानी की यह विभाग के नौकरशाहों पर है। परन्तु जो अपनी उम्र का जो 10 वर्ष विभाग को दे चुके है वे अब निकाले जाने पर क्या कार्य करेगें पता नहीं परन्तु यदि कोई कर्मचारी 10 वर्ष से विभाग और उसके अधीनस्थ इकाइयों में कार्य कर रहा है उसे हटाना बिलकुल सही नहीं है वो भि वो कर्मचारी जो ई-ऑफिस, ई-डॉक, ई0आर0पी0 पर अपने अधिकारियों का कार्य करते है। अतः मेरा सरकार से अनुरोध है कि सोर्स, जग, पहुंच वाले कर्मचारियों को बाहर करें न कि अपनी मेहत का 10 वर्ष दे चुके निविदा कर्मचारियों का। अगर एक भी कर्मचारी आत्महत्या करता है तो इसका जिम्मेवार प्रशासन ही होगा। संविदा कर्मचारियों को बड़ी बड़ी मूर्तियों बडे बडे मन्दिर मस्जिद नहीं चाहिए उन्हें सिर्फ इतना चाहिए जिससे उनका घर का चूल्हा जल सके वो भी अब छीना जा रहा है। #राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद #कर्मचारी

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