#holi "दुनिया के हर रंग फीके पड़ गए,
जब रूह ने सच पहचाना;
मोक्ष की होली खेलने को,
शमशान ही बना ठिकाना।
यहाँ न कोई ज़ात है,
न कोई गुरूर का साया;
राख उड़ाते महादेव ने,
खुद को ही गले लगाया।
रंगों की भीड़ में ढूँढते रहे,
तुम जिन्हें ता-उम्र,
मशाने की राख में वो महाकाल,
सबसे पहले नज़र आया।।"
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