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यया तु धर्मकामार्थान्धत्या धारयतेऽर्जुन। प्रसङ्‍गेन फलाकाङ्क्षी धृतिः सा पार्थ राजसी৷৷18.34৷৷ 🪷🌹नये दिन की राम राम 🌹🪷 भावार्थ : परंतु हे पृथापुत्र अर्जुन! फल की इच्छावाला मनुष्य जिस धारण शक्ति के द्वारा अत्यंत आसक्ति से धर्म, अर्थ और कामों को धारण करता है, वह धारण शक्ति राजसी है ৷৷18.34॥ #🕉️सनातन धर्म🚩 #🙏गुरु महिमा😇 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🌸जय सिया राम #🙏कर्म क्या है❓

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