जय माता दी! आज 1 मार्च 2026 के इस पावन अवसर पर, जम्मू के कटरा में स्थित त्रिकुटा पर्वत पर विराजमान माता वैष्णो देवी जी की आरती का भाव और दर्शन कुछ इस प्रकार है:
माँ वैष्णो देवी आरती दर्शन
पिण्डी स्वरूप में विराजमान माँ वैष्णो देवी की आरती अत्यंत दिव्य और अलौकिक होती है। यहाँ माँ तीन मुख्य पिण्डियों के रूप में भक्तों को आशीर्वाद देती हैं:
* महाकाली: (दाएँ) जो तामस गुणों का संहार करती हैं।
* महालक्ष्मी: (मध्य) जो सत्व गुण और समृद्धि की प्रतीक हैं।
* महासरस्वती: (बाएँ) जो ज्ञान और चेतना का संचार करती हैं।
आरती का मुख्य भाव
> "प्रेम से बोलो, जय माता दी! सारे बोलो, जय माता दी!"
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पवित्र गुफा के भीतर जब पुजारियों द्वारा मंत्रोच्चार और शंख ध्वनि के बीच आरती की जाती है, तो पूरा वातावरण सकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है। पिण्डी स्वरूप का श्रृंगार ताजे पुष्पों, स्वर्ण आभूषणों और रेशमी वस्त्रों से किया जाता है।
आज का संदेश
माँ वैष्णो देवी के दरबार से आज का संदेश यही है कि मनुष्य अपने भीतर के अंधकार को मिटाकर श्रद्धा और विश्वास के साथ आगे बढ़े। माँ के दर्शन मात्र से ही भक्तों के कष्टों का निवारण होता है।
मन में माँ का ध्यान करते हुए कहें:
या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
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