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"मांस खाना महापाप है" — यह केवल एक भावनात्मक बात नहीं, बल्कि संत कबीर साहेब जैसे परम संतों का स्पष्ट आदेश है। परमात्मा ने फल, बीज और शाक को हमारे आहार बनाया है, मांस नहीं। 👇 पढ़िए कबीर वाणी और धर्म का सत्य: "कबीर, तिलभर मछली खायके, कोटि गऊ दे दान। काशी करौंत ले मरे, तो भी नरक निदान।।" तिल भर मछली खाने से भी करोड़ों गौदान और काशी में बलिदान व्यर्थ है। "मांस खाकर, परमात्मा का विधान तोड़ रहे हो। जीव हिंसा सबसे बड़ा पाप है। जो जीव मारते हैं, वे करोड़ों जन्म सिंह, साँप, भेड़िया बनते हैं।" "जो गल काटै और का, अपना रहै कटाय। साईं के दरबार में बदला कहीं न जाय।।" जो जीव मारते हैं, उनका अंत भी वैसा ही होता है। कर्म का हिसाब जरूर होता है। 🌱 परमात्मा ने बासमती चावल, घी, खांड, फल, सब्जियाँ खाने को दी हैं। ##santrampaljimaharaj #santrampaljimaharaj #sanewchannal #factful depate #AnnapurnaMuhim

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