अधर्मं धर्ममिति या मन्यते तमसावृता।
सर्वार्थान्विपरीतांश्च बुद्धिः सा पार्थ तामसी৷৷18.32৷৷
🪷🥀नये दिन की राम राम 🥀🪷
भावार्थ : हे अर्जुन! जो तमोगुण से घिरी हुई बुद्धि अधर्म को भी 'यह धर्म है' ऐसा मान लेती है तथा इसी प्रकार अन्य संपूर्ण पदार्थों को भी विपरीत मान लेती है, वह बुद्धि तामसी है ৷৷18.32॥ #🕉️सनातन धर्म🚩 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🕉 ओम नमः शिवाय 🔱 #🙏कर्म क्या है❓