श्री मद भगवत गीता 9.4
#geeta #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गीता ज्ञान🛕 मया ततमिदं सर्वं जगदव्यक्तमूर्तिना।
मत्स्थानि सर्वभूतानि न चाहं तेष्ववस्थितः।। 9.4।।
अर्थ: यह समस्त ब्रह्मांड मेरे निराकार (अव्यक्त) रूप द्वारा व्याप्त है। सभी जीव मुझमें स्थित हैं, लेकिन मैं उनमें स्थित नहीं हूँ (मैं उनसे पृथक हूँ)।