शेगाँव की पावन भूमि से प्रकट वह दिव्य चेतना, जिनका जीवन स्वयं साधना था और वाणी स्वयं उपदेश।
“गण गण गणात बोते” केवल जाप नहीं, यह स्मरण है कि ईश्वर बाहर नहीं, प्रत्येक जीव के हृदय में निवास करता है।
कर्म और भक्ति के संतुलन से जीवन को दिशा देने वाले सन्त गजानन महाराज आज भी शेगाँव में अनुभूत होते हैं।
“या जागी राहील रे”
मैं गया नहीं, मैं यहीं हूँ।
मेरी संस्कृति… मेरा देश… मेरा अभिमान 🚩
#moj_content #📢 ताज़ा खबर 🗞️ #🔴 क्राइम अपडेट #🌞 Good Morning🌞