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जब हम बचपन में थे, तब होली का आनंद ही कुछ और होता था 🥹🌸। उन दिनों न किसी बात की चिंता थी, न ही समय की भागदौड़ का एहसास ❤️। जैसे ही होली नज़दीक आती, दिल में एक अलग सी खुशी अपने आप जग जाती थी ✨। नए कपड़ों की नहीं, बल्कि पुराने कपड़ों में रंगों से सराबोर होने की उत्सुकता रहती थी 🎨। सुबह होते ही हाथ में पिचकारी और जेब में गुलाल लेकर दोस्तों के घर दौड़ पड़ते थे 😄। गलियों में हंसी की गूंज होती थी और हर चेहरा रंगों से भरा हुआ भी पहचान में आ जाता था 🌈। माँ की बनाई हुई गुजिया और पकवानों की खुशबू पूरे घर में मिठास घोल देती थी 🍬🥰। कोई रूठता नहीं था, कोई बुरा नहीं मानता था, बस सब एक-दूसरे को गले लगाकर रंग लगा देते थे 🤗💖। उस समय न मोबाइल था, न फोटो खींचने की चिंता, फिर भी हर पल दिल के कैमरे में हमेशा के लिए कैद हो जाता था 📸💫। दोपहर की धूप में भीगते हुए भी चेहरे पर मुस्कान बनी रहती थी ☀️😊। शाम तक थककर जब घर लौटते, तो शरीर रंगों से भरा होता था लेकिन मन सुकून और खुशी से भरा रहता था 🌷। बचपन की वह होली सच्ची, मासूम और दिल से जुड़ी हुई होती थी 💞। आज भी जब होली आती है, तो वही पुरानी यादें मन को भीगा देती हैं 😢🌼। सच कहें तो बचपन की होली सिर्फ एक त्योहार नहीं थी, वह हमारे जीवन की सबसे प्यारी और रंगीन यादों का हिस्सा थी 🎉💕।आज भी मन करता है कि काश फिर से वही बचपन लौट आए 🥺🌷। फिर से बिना किसी डर के, बिना किसी फिक्र के, खुलकर बिंदास होली खेलें 🎉। न किसी की डांट सुनने का डर हो, न कपड़ों के खराब होने की चिंता 😅। बस रंग हो, दोस्त हों और दिल से निकली हंसी हो 💕। शाम तक थककर जब घर लौटते थे, तो शरीर रंगों से भरा होता था लेकिन मन सुकून और खुशी से भरा रहता था ☀️😊। बचपन की वह होली सच्ची, मासूम और दिल से जुड़ी हुई होती थी 💞। आज भी जब होली आती है, तो वही पुरानी यादें आंखों को हल्का सा नम कर देती हैं 😢🌼। सच कहें तो बचपन की होली सिर्फ एक त्योहार नहीं थी, वह हमारे जीवन की सबसे प्यारी और रंगीन यादों का हिस्सा थी 🎨❤️। #☝ मेरे विचार #📒 मेरी डायरी

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