नशे की शुरुआत ज़रूरी नहीं कि किसी बड़े संकट से हो। कई बार यह एक ‘छोटी-सी’ राहत से शुरू होती है, जो धीरे-धीरे हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा बन जाती है।
विज्ञान पहले ही बता चुका है कि शराब और तंबाकू जैसे पदार्थ रोके जा सकने वाले कैंसर के बड़े कारणों में से हैं। अकेला तंबाकू ही मुँह, गले, फेफड़ों और पेट के कैंसर से जुड़ा है। वहीं शराब इन ख़तरों को और बढ़ा देती है—जिससे अन्ननली, लिवर, कोलन, रेक्टम और स्तन कैंसर का जोखिम बढ़ता है।
ये फैसले अक्सर सिर्फ़ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहते। इसलिए #LookAgain। टाटा ट्रस्ट्स हर किसी से अपील करते हैं कि आज जो आदतें छोटी लगती हैं, उन्हें पहचानें—क्योंकि उनके नतीजे कभी छोटे नहीं होते।
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