कुपोषण हमेशा भूख जैसा नहीं दिखता। यह उन बच्चों में दिखता है जो अपनी उम्र के हिसाब से छोटे रह जाते हैं, जल्दी वजन कम कर लेते हैं या बार-बार बीमार पड़ते हैं। जब ये संकेत आम हो जाते हैं और बच्चों की बढ़त पर नज़र नहीं रखी जाती, तो कुपोषण अक्सर नज़रअंदाज़ हो जाता है।
जीवन के पहले तीन सालों में बच्चों की लंबाई रुकने (स्टंटिंग) का खतरा तेजी से बढ़ता है—यह एक अहम समय होता है, जब सही पोषण न मिलने से बच्चे की शारीरिक बढ़त, दिमागी विकास और रोग प्रतिरोधक क्षमता पर स्थायी असर पड़ सकता है। वेस्टिंग (अत्यधिक दुबलापन) ज्यादा तुरंत असर दिखाता है। बीमारी और सही आहार की कमी से बच्चा जल्दी खतरनाक रूप से कमजोर हो सकता है, जो कभी-कभी जानलेवा भी बन सकता है। अंडरवेट इन दोनों का संकेत है और लंबे समय से चल रहे कुपोषण को दर्शाता है। समय के साथ कुपोषण की स्थिति समझने के लिए यह एक महत्वपूर्ण मापदंड है।
कुपोषण सिर्फ थाली में खाने की कमी नहीं है। यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि खाना बच्चे की उम्र के अनुसार हो, हल्का लेकिन पोषक हो, बार-बार खिलाया जाए, और साफ-सफाई व स्वास्थ्य सेवाओं की सही सुविधा मिले।
मातृ और शिशु स्वास्थ्य तथा सामुदायिक पोषण में लगातार काम के जरिए, टाटा ट्रस्ट्स कुपोषण के मूल कारणों को दूर करने की कोशिश कर रहा है, क्योंकि रोकथाम वहीं से शुरू होती है जहाँ यह दिखना शुरू भी नहीं हुआ होता।
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