जब से UGC क़ानून आया है, इसके ख़िलाफ़ एक से बढ़कर एक तर्क दिए जा रहे हैं! एक सज्जन तो मुझसे ही पूछ रहे थे कि जब संविधान ने ऊंच-नीच ख़त्म कर दिया और सबको बराबर बता दिया तो फिर इस नए क़ानून की क्या जरूरत थी?
कह रहे थे कि ये देश सभी का है…सभी पढ़ने जा सकते हैं…सभी को आज़ादी है…सभी आज़ाद हैं…देश भर का ज्ञान दिए जा रहे थे…और मैं सोच रही थी कि ये सब बातें तब कहाँ चली जाती हैं जब किसी कमजोर के ऊपर पेशाब कर दिया जाता है?
कहाँ चला जाता है सारा ज्ञान…जब किसी अल्पसंख्यक का घर गिरा दिया जाता है? क्यों नहीं बोलता कोई जब उन्हें पंचर बनाने वाला कह कर उनका मजाक उड़ाया जाता है? समानता की ये सारी बातें कहाँ धरी रह जाती हैं जब किसी अख़लाक़ या किसी हरिओम वाल्मीकि को पीट-पीटकर निपटा दिया जाता है?
आज जो लोग UGC क़ानून के लिए सरकार को भला-बुरा कह रहे हैं, वही लोग कितनी चालाकी से हिंदूराष्ट्र के नाम पर होने वाले अत्याचारों को देशहित में बताने लगते हैं! तब सारी तार्किकता और संविधान का ज्ञान कहाँ चला जाता है? SC ST एक्ट की बात आती है तो झट से बोलने लगते हैं कि भाई हमने थोड़े ही अत्याचार किया था! वो तो पुराने जमाने की बातें हैं! पुरखों ने की होंगी बदमाशियाँ! हम तो एकदम इक्वलिटी में यकीन करने वाले मॉडर्न लोग हैं जी!
मैं हैरान हूँ! दो पीढ़ी पहले के अत्याचारों को पुराने जमाने की बात बताने वाले लोग कैसे झटपट किसी गरीब अल्पसंख्यक को बाबर और औरंगज़ेब का वंशज बता देते हैं? ये किस तरह की धूर्तता है?
आज ये लोग ख़ुद UGC क़ानून पर सरकार से सवाल पूछ रहे हैं…लेकिन चार दिन पहले यही लोग सरकार से सवाल पूछने वालों को देशद्रोही कह रहे थे! ये किस तरह की बदमाशी है भाई?
इस भस्मासुर सरकार को आप लोगों ने ही तो तैयार किया है! जब तक दूसरों पर बुलडोज़र चलाया जा रहा था तब तक सबसे ज़्यादा मजा आप लोगों को ही तो आ रहा था! अब बात ख़ुद पर आई तो डेमोक्रेसी याद आ रही है? लॉजिक और क़ायदा याद आ रहा है?
मैं पूछती हूँ आख़िर दिक्कत क्या है इस UGC क़ानून से? जब आप भेदभाव करते ही नहीं हैं तो बनने दीजिए न क़ानून! कोई ग़लत फँसाएगा तो उसके लिए कमेटी है ही! न्यायालय भी है! डर क्यों रहे हैं?
ज़्यादा परेशान मत होइए…उन्होंने क़ानून बनवाया है तो कुछ सोच-समझकर ही बनवाया होगा. UGC क़ानून देशहित में है. इसका विरोध करके देश से ग़द्दारी मत कीजिए. “अखंड भारत” बनाना है तो थोड़ी-बहुत कुर्बानी आपको भी देनी होगी. चलिए…तैयार हो जाइए! #ugc bill #देशभक्त बनो, अंधभक्त नहीं #🎞️आज के वायरल अपडेट्स
अब क्यों पेट दुख रहा जब सबको समान समझा जाने वाला कानून बन गया , मतलब साफ है कि तुम स्वर्ण हमेशा अपनी मनमानी करते रहो और राज करते रहो । जिस मोदी सरकार ने ये कानून लाया तुमने उसकी जात भी बता दी बिल आने के बाद । इसलिए बाबा साहब ने संविधान में सबको समान अधिकार दिए और विरोध पूरे जनरल ने किया ।