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गीता अध्याय नं. 15 श्लोक नं. 1 व 4 में तत्वदर्शी सन्त की पहचान बताई गई है तथा कहा है कि तत्वदर्शी सन्त से तत्वज्ञान जानकर उसके पश्चात् उस परमपद परमेश्वर की खोज करनी चाहिए। जहां जाने के पश्चात् साधक लौट कर संसार में नहीं आते अर्थात् पूर्ण मुक्त हो जाते हैं। उसी पूर्ण परमात्मा से संसार की रचना हुई है। संत रामपाल जी महाराज ही वह तत्वदर्शी संत हैं। # #📓 हिंदी साहित्य #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇 #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #सुविचार एवं अनमोल वचन

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11 दिन पहले