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कितनी सुंदर और गहरी बात कही है आपने। यह अटूट विश्वास ही इंसान को कठिन से कठिन रास्तों पर भी सुकून और हिम्मत देता है। जब हम जीवन की 'सीढ़ियां' चढ़ते हैं—चाहे वे सफलता की हों या संघर्ष की—तो अक्सर थकावट महसूस होने लगती है। लेकिन यह सोच ही मन को शांत कर देती है कि कोई है जो अदृश्य रूप से हमारा हाथ थामे हुए है। बरसाना या कोई भी पावन स्थल केवल पैरों के चलने से नहीं, बल्कि उस 'बुलावे' से मिलता है जो सीधा हृदय तक पहुंचता है। यह भाव समर्पण (Surrender) का सबसे उत्तम उदाहरण है। जब हम खुद को उनके हवाले कर देते हैं, तो सफर की थकान भी प्रसाद की तरह लगने लगती है। #भक्ति

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5 दिन पहले