महान भारतीय स्वतंत्रता सेनानी एवं क्रांतिकारी खुदीराम बोस जी की 118 वी शहादत दिवस पर मैं आप को कोटिशः नमन तथा विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। खुदीराम बोस भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान क्रांतिकारी थे। बहुत कम उम्र में उन्होंने अंग्रेजी शासन के विरुद्ध संघर्ष किया और 18 वर्ष की आयु में शहीद हो गए। उन्हें भारत के सबसे कम उम्र के शहीद क्रांतिकारियों में प्रमुख रूप से याद किया जाता है।खुदीराम बोस किशोरावस्था से ही देश की आजादी के लिए सक्रिय हो गए थे। वे अनुशीलन समिति जैसे क्रांतिकारी संगठनों से जुड़े और ब्रिटिश शासन के खिलाफ पर्चे बाँटने तथा क्रांतिकारी गतिविधियों में भाग लेने लगे। उस समय बंगाल में बंगाल विभाजन (1905) के विरोध में स्वदेशी आंदोलन तेज हो रहा था। इसका प्रभाव खुदीराम बोस पर भी पड़ा। 1908 में खुदीराम बोस और प्रफुल्ल चाकी को ब्रिटिश अधिकारी डगलस किंग्सफोर्ड को निशाना बनाने का काम सौंपा गया। किंग्सफोर्ड उस समय मुजफ्फरपुर में जिला एवं सत्र न्यायाधीश थे और क्रांतिकारियों के प्रति कठोर रवैये के लिए जाने जाते थे। 30 अप्रैल 1908 की रात खुदीराम बोस और प्रफुल्ल चाकी ने एक बग्घी पर बम फेंका, लेकिन वह किंग्सफोर्ड की बग्घी नहीं थी। उसमें प्रिंगल कैनेडी की पत्नी और बेटी सवार थीं, जिनकी मृत्यु हो गई। इसके बाद दोनों क्रांतिकारियों को पकड़ने के लिए व्यापक अभियान चलाया गया। खुदीराम बोस को 1 मई 1908 को वैनी रेलवे स्टेशन (वर्तमान पूसा रोड क्षेत्र) के पास गिरफ्तार किया गया। उन पर मुकदमा चलाया गया और उन्हें फाँसी की सजा सुनाई गई।11 अगस्त 1908 को मुजफ्फरपुर जेल में खुदीराम बोस को फाँसी दे दी गई। उस समय उनकी उम्र लगभग 18 वर्ष 8 महीने थी। उनकी शहादत ने पूरे देश के युवाओं में देशभक्ति और स्वतंत्रता की भावना को और मजबूत किया। आप की शहादत के बाद वे भारतीय युवाओं के लिए साहस और बलिदान के प्रतीक बन गए। उनके जीवन पर कई पुस्तकें, कविताएँ और फिल्में बनाई गई हैं। पश्चिम बंगाल और बिहार सहित कई स्थानों पर उनके नाम पर सड़कें, संस्थान और स्मारक हैं।🫡🫡🫡🇮🇳🇮🇳🇮🇳🙏 #viral #deshbhakti #india #history #jaihind

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