#शिवजी_की_सत_साधना_करो
श्रीमद्भागवत-महापुराण (प्रथम खंड), स्कन्ध 3, अध्याय 29 श्लोक 21-22; श्रीमद्भागवत महापुराण, स्कन्ध 10, अध्याय 84, श्लोक 11, 13 में स्पष्ट लिखा है कि जो मिट्टी, पत्थर, काष्ठ (लकड़ी) आदि पार्थिव विकारों को ही इष्टदेव मानता है और तथा जो केवल जल को ही तीर्थ समझता है वह मनुष्य होने पर भी पशुओं में भी नीच गधा ही है। अब विचार करो कांवड़ लाने और शिवलिंग में जल चढ़ाने से क्या मिलेगा? इसलिए आदि सनातनी पूजा जानने के लिए देखिए Sant Rampal Ji Maharaj YouTube Channel ##विश्व_शुभचिंतक_संतरामपालजी