ShareChat
click to see wallet page

भगवान विष्णु के दस अवतारों (दशावतार) में मत्स्य अवतार प्रथम अवतार है। इस अवतार का मुख्य उद्देश्य सृष्टि को एक महान जल प्रलय से बचाना और वेदों की रक्षा करना था। ​मत्स्य अवतार की कथा ​1. राजा सत्यव्रत और छोटी मछली ​प्राचीन काल में, द्रविड़ देश के एक धर्मात्मा राजा हुए जिनका नाम सत्यव्रत (जिन्हें मनु भी कहा जाता है) था। एक दिन, राजा सत्यव्रत कृतमाला नदी में स्नान कर रहे थे और जल में अंजुलि (हथेली) में जल लेकर सूर्य देव को अर्घ्य देने वाले थे, तभी उनके हाथ में एक छोटी मछली आ गई। ​मछली ने राजा से प्रार्थना की कि उसे बड़े जीवों से खतरा है, इसलिए उसे बचा लें। राजा सत्यव्रत को उस पर दया आ गई और वे उसे अपने महल में ले आए और एक छोटे बर्तन में रखा। ​2. मछली का विशाल रूप ​अगले ही दिन, राजा ने देखा कि वह मछली इतनी बड़ी हो गई है कि बर्तन छोटा पड़ गया है। तब राजा ने उसे एक छोटे तालाब में डाल दिया, पर वह मछली जल्द ही तालाब में भी बड़ी हो गई। राजा ने उसे गंगा नदी में डाला, लेकिन वह नदी भी उसके लिए छोटी पड़ गई। अंत में, राजा उसे समुद्र में छोड़कर आए। ​समुद्र में भी मछली का आकार लगातार बढ़ता गया और वह पूरे सागर में समाने लगी। तब राजा सत्यव्रत को ज्ञान हुआ कि यह कोई साधारण मछली नहीं, बल्कि स्वयं भगवान विष्णु का अवतार है। ​3. प्रलय की चेतावनी और वेदों की रक्षा ​राजा सत्यव्रत ने प्रणाम करके पूछा, "हे प्रभु! आप कौन हैं और मुझे क्यों दर्शन दिए?" ​तब भगवान विष्णु ने अपने दिव्य मत्स्य रूप का दर्शन देते हुए राजा को बताया कि सातवें दिन पृथ्वी पर भयंकर जल प्रलय (महाप्रलय) आने वाला है, जो पूरी सृष्टि को डुबो देगा। भगवान ने राजा को निर्देश दिया कि वे एक बड़ी नाव (किश्ती) तैयार करें और उसमें सभी प्राणियों (बीज रूप में) और सप्त ऋषियों को लेकर सुरक्षित स्थान पर चले जाएं। ​एक अन्य मान्यता के अनुसार, इस समय हयग्रीव नामक राक्षस ने ब्रह्मा जी की निद्रा का लाभ उठाकर वेदों को चुरा लिया था और उन्हें समुद्र की गहराई में छिपा दिया था। भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार धारण कर समुद्र में जाकर हयग्रीव का वध किया और वेदों को पुनः प्राप्त करके ब्रह्मा जी को सौंप दिया। ​4. प्रलय से उद्धार ​सातवें दिन जब भयंकर जल प्रलय आया, तो राजा सत्यव्रत ने सप्त ऋषियों और सभी प्राणियों के साथ उस विशाल नाव में आश्रय लिया। ​भगवान विष्णु मत्स्य रूप में प्रकट हुए और राजा को आदेश दिया कि वे अपनी नाव को नागराज शेषनाग (या नाव को मत्स्य के सींग) से बाँध लें। भगवान मत्स्य ने अपनी विशाल शक्ति से उस नाव को तूफानी लहरों के बीच सुरक्षित रूप से हिमालय की चोटी तक पहुँचाया, जिससे सृष्टि का विनाश होने से बच गया। ​प्रलय शांत होने के बाद, भगवान विष्णु ने मनु को वेदों का ज्ञान दिया और सृष्टि के पुनर्निर्माण का कार्य सौंपा। इस प्रकार, मत्स्य अवतार ने सृष्टि, ज्ञान और धर्म की रक्षा की। #ഗീതോപദേശം ഹൈന്ദവ പുരാണം #mythology #sanathanbharat #🕉️ഓം നമഃശിവായ #🙏സായിബാബ

803 കണ്ടവര്‍