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लिखा हुआ राम नाम देखा जो अंगूठी पै तो पड़ गयी वेदेही बड़ी ही उलझन में सोचने लगीं ये अंगूठी उन्की है जिन्हें जीत नहीं सकता कोई त्रिभुवन में हर्ष से भर गया हृदय विषाद चल चल कर उठ अश्रु नयन में बार बार मुद्रिका को मस्तक से स्पर्श कर प्रभु को प्रणाम किया मन ही मन में ।। 46.7 हज़ार #ramayan ## Jay shriram #🙏🙏 JAY SHRIRAM🙏🙏

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