ShareChat
click to see wallet page

“करोड़ों रामभक्तों की साँसों का कंपन आज धर्म-ध्वज बनकर अयोध्या में लहराएगा… जब यह ध्वज आकाश की ऊँचाइयों को छुएगा, तो ऐसा लगेगा मानो स्वयं प्रभु राम की चरणध्वनि अयोध्या की धरती पर पुनः गूंज उठी हो। यह ध्वज जब सूर्य की किरणों से छुएगा… तो लगेगा मानो स्वयं त्रेता बोल उठी हो— ‘अयोध्या अब सिर्फ़ एक नगर नहीं, अयोध्या अब राष्ट्र की नाड़ी है।’ भक्तों के मन में जो आस्था है, वह इस ध्वज के हर धागे में बसी है— किसी में सीता का अविचल धैर्य, किसी में शबरी की सात्विक प्रतीक्षा, किसी में निषादराज की अनुपम मित्रता, किसी में वानरों का अडिग पराक्रम, और किसी में विभीषण की निष्कपट सच्चाई। आज जब यह ध्वज लहरता है न… तो यह केवल हवा नहीं काटता— यह पाप का भ्रम काटता है, अज्ञान का कुहासा मिटाता है, और मनुष्य को याद दिलाता है कि सत्य का मार्ग कठिन हो सकता है पर उसका विजय-ध्वज सदैव अमर रहता है। ये वही ध्वज है… जिसने युगों तक प्रतीक्षा की, जिसने ताड़िका के अंधकार से लेकर रावण के अहंकार तक हर तूफ़ान को चीरकर स्वयं को बचाए रखा। यह वही ध्वज है— जो वनवास के हर पग में साथ चला, जिसने पंचवटी की चुप्पी सुनी, जिसने लंका की रण-गर्जना देखी, और जिसने सेतुबंध की महिमा में भक्तों के परिश्रम का पसीना महसूस किया। आज जब यह अयोध्या की हवा में उठेगा— तो समझ लेना… धर्म सिर्फ़ जागा नहीं है, धर्म आज अपने सिंहासन पर लौट आया है। जहाँ यह ध्वज लहरता है न… वहीं पर सनातन श्वास लेता है। वहीं पर इतिहास पुनः लिखा जाता है। और वहीं से वह शक्ति उठती है जो इस धरती को धर्म, साहस और करुणा से भर देती है। आज… अयोध्या का धर्मध्वज सिर्फ़ ध्वज नहीं— पूरे राष्ट्र की धड़कन है। एक साधारण भारतीय 🇮🇳 सौरभ व्यास 🚩 #श्री अनिरुद्ध आचार्य महाराज जी 🙌 #🙏 🌟श्री अनिरुद्ध आचार्य महाराज जी 🌟🙏

1.7K ने देखा
4 महीने पहले